वाराणसी में सुमेरु पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती मंगलवार को धीरेंद्र शास्त्री पर भड़क गए। उन्होंने दैनिक भास्कर से कहा- भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराम के बीच अंतर बताने वाले व्यक्ति से बड़ा मूर्ख और अज्ञानी शायद ही कोई होगा। शिव, कृष्ण और राम में कोई अंतर नहीं है।
उन्होंने कहा- किसी कथावाचक को नशे में या किसी अन्य स्थिति में ऐसी अनर्गल टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। जिससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हों। देशद्रोही गतिविधियों में जो लिप्त हैं, उन्हें शूट कर देना चाहिए।
शंकराचार्य ने कहा- सरकारों की हिम्मत नहीं है कि मस्जिद-चर्च ले लें। मगर हिंदुओं का मंदिर लेकर उसका धर्म हड़पना चाहते हैं। मंदिर पर सनातनियों और हिंदुओं का अधिकार होना चाहिए।
दरअसल, 29 अक्टूबर को मध्य प्रदेश के शिवपुरी में रामकथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था- हमारे राम सीधे हैं, तुम्हारे कृष्ण टेढ़े। तुम्हारे ठाकुरजी की खोपड़िया भी टेढ़ी, नाम भी टेढ़ा और चलते-खड़े भी टेढ़े होते हैं। हालांकि, मामले में विवाद के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने अपने बयान पर माफी भी मांगी थी।
रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में संस्कृति संसद का आज शुभांरभ हुआ। 5 नवंबर तक चलने वाली संसद में देशभर से करीब 3000 संत और 7000 से अधिक युवा शामिल हो रहे हैं। इसमें देश-विदेश के विद्वान, वैज्ञानिक, कलाकार और शिक्षाविद हैं।
सुमेरु पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर आक्रोश जताया। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी मर्यादा और सीमा में रहकर बयान देना चाहिए। देवी-देवता लोगों की आस्था के केंद्र हैं। किसी कथावाचक को नशे में या किसी अन्य स्थिति में ऐसी अनर्गल टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। जिससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हों।
भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराम के बीच अंतर बताने वाले व्यक्ति से बड़ा मूर्ख और अज्ञानी शायद ही कोई होगा। करीब 500 वर्ष पहले गोस्वामी तुलसीदास जब ब्रज पहुंचे और उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन किए, तो कहा था- 'तुलसी मस्तक तब नवै, धनुष बाण ले हाथ।'
भगवान श्रीकृष्ण ने तुलसीदास को अपने हाथों में धनुष-बाण धारण कर श्रीराम के स्वरूप में दर्शन दिए थे। उन्होंने कहा कि भगवान शिव, श्रीकृष्ण और श्रीराम में कोई भेद नहीं है। ये सभी अभिन्न हैं। तत्व की दृष्टि से सभी एक हैं।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने कहा कि हर समय वाणी पर मां सरस्वती और बुद्धि पर मां लक्ष्मी की कृपा एक समान नहीं रहती। संसार के बड़े-बड़े सिद्ध और संतों से भी कभी-कभी बोलने में चूक हो जाती है। इसे अंग्रेजी में 'लैंग्वेज स्लिप' कहा जाता है। धीरेंद्र शास्त्री का बगैर नाम लिए कहा- वे युवा हैं और हनुमान जी की उन पर विशेष कृपा है। इसलिए भगवान के स्वरूप और देवताओं को लेकर ऐसी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, जिससे समाज में मतभेद पैदा हों।
भगवान श्रीकृष्ण ब्रह्म के अवतार हैं और उनके बारे में की गई टिप्पणी उचित नहीं है। वे एक साधु और ब्राह्मण हैं। लेकिन भौतिक वैभव और गद्दी मिलने के बाद व्यक्ति के विचारों और व्यवहार में बदलाव आ सकता है। गद्दी पर बैठने के बाद बहुत लोगों को नीचे गिराने के लिए उनके शब्द काफी होते हैं।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने कहा कि हरिद्वार और काशी ऐसी पवित्र भूमि हैं, जहां से सनातन धर्म के लिए लिया गया संकल्प पूरा होता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में भीड़ जुटाना आसान है। पूड़ी और पैसे देकर लोगों को इकट्ठा किया जा सकता है, लेकिन संतों को एकजुट करना आसान नहीं है।
विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि दिल्ली में जो आंदोलन चल रहा है। यह देश को बांटने का काम कर रहा है। आंदोलन को मुस्लिम समुदाय का समर्थन मिल रहा है। इसमें वामपंथी विचारधारा से जुड़े लोग भी सक्रिय हैं। चुनावों में गाय का मुद्दा भी आएगा। गाय के मुद्दे पर अखिलेश और राहुल पर पर विश्वास कर सकते हैं क्या? अगर कोई बड़े संत केंद्र सरकार को और योगी जी को गौ माता के बारे में कठिन शब्दों का प्रयोग करें, तो यह जो सारा षड्यंत्र है। यह षड्यंत्र केवल मोदी सरकार बदलने के लिए नहीं, यह संपूर्ण व्यवस्था को बदलने के लिए है।
स्वामी जितेंद्रानंद ने कहा- चंपत राय पर हमेशा विश्वास रहेगा
अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में चंपत राय के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि के मुकदमे को 35 वर्षों तक पूरी निष्ठा से संभालने वाले चंपत राय का योगदान अविस्मरणीय है। उन पर उनका विश्वास पहले भी था, आज भी है और अंतिम सांस तक रहेगा।
उन्होंने कहा कि 492 वर्षों के संघर्ष के बाद अयोध्या में भव्य राम मंदिर बन चुका है। चंपत राय को बदनाम करने और उनके योगदान पर सवाल उठाने के प्रयास हुए, लेकिन इससे उनका समर्पण कम नहीं हो सकता। स्वामी जितेंद्रानंद ने कुछ राजनीतिक दलों पर मंदिर निर्माण और चंदा अभियान का विरोध करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अब उनके योगदान के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
संसद में चंपत राय भी पहुंचे हैं। देशभर से आए संतों ने मंच पर उनका सम्मान किया। इस दौरान मंच पर वह भावुक हो गए। चंपत राय ने सभी संतो के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
विश्व हिंदू परिषद के संरक्षक दिनेश ने कहा कि वर्तमान समय में सबसे अधिक जमीन पर कब्जा वक्फ बोर्ड के पास है। इसके बाद रेलवे और सेना के पास सबसे अधिक भूमि है। उन्होंने कहा कि जब भी सरकार की ओर से इस दिशा में कोई प्रयास किया जाता है, तो उसका विरोध शुरू हो जाता है। पूर्ववर्ती सरकारों ने इस व्यवस्था को संरक्षण दिया, जिसके चलते आज ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले पर संतों को गंभीरता से विचार-विमर्श करना होगा और आगे की दिशा तय करनी होगी।
ससंद में बंगाल से भी संत पहुंच रहे हैं। उनके हाथों में मां दुर्गा का ध्वज है।
सुनील देवधर ने कहा कि वामपंथी विचारधारा के लोग देवी-देवताओं के हाथों से शस्त्र हटाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मां दुर्गा के हाथों से शस्त्र हटवाकर पाप किया है। हम युवाओं को बताएंगे कि हमारे सनातन में क्या ताकत है। कहा कि 31 दिसंबर 1996 तक जन्म लेने वालों को मिलेनियल और 1 जनवरी 1997 से जन्म लेने वालों को जेनरेशन Z कहा जाता है। उन्होंने सवाल किया कि महज एक दिन के अंतर से किसी व्यक्ति की पीढ़ी और पहचान कैसे बदल सकती है? इस तरह का वर्गीकरण पश्चिमी सोच का उदाहरण है।
भारतीय युवाओं की पहचान किसी पश्चिमी लेबल से नहीं, बल्कि उनके संस्कार, चरित्र, प्रतिभा, राष्ट्रभक्ति और अपनी सभ्यता के प्रति गौरव से होनी चाहिए। युवाओं को सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना और भारतीय परंपराओं के प्रति उनमें गौरव का भाव जगाना ही संस्कृति संसद जैसे आयोजनों का मूल उद्देश्य होना चाहिए।
स्वामी जितेन्द्रानंद ने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर जिस तरह से जेन-जी (Gen Z) की तस्वीर सामने आई। उसने पूरी दुनिया के सामने भारत की नई पीढ़ी की एक नकारात्मक छवि प्रस्तुत की। ऐसे में हमारा प्रयास है कि हम युवाओं को उनकी उस वास्तविक तस्वीर और संस्कृति से रूबरू कराएं। जिसके लिए भारत विश्वभर में जाना जाता है।
जंतर-मंतर पर मौजूद 50 हजार युवा देश की पूरी जेन-जी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते। यदि हम इन्हें ही जेन-जी मान लें, तो फिर उन युवाओं को क्या कहेंगे, जो साढ़े चार करोड़ की संख्या में हरिद्वार से कांवड़ लेकर निकले थे? काशी हो या बिहार में देवघर की कांवड़ यात्रा, हर जगह बड़ी संख्या में नई पीढ़ी के युवा भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़े हुए दिखाई देते हैं। दिल्ली में कुछ लोगों द्वारा किया गया विरोध-प्रदर्शन पूरी युवा पीढ़ी की तस्वीर पेश नहीं कर सकता।
संसद में इस कॉन्क्लेव के आयोजन के पीछे हमारी मूल मंशा नई पीढ़ी के विचारों को जानना, उनकी सोच को समझना है। उन्हें अपनी संस्कृति एवं परंपराओं से जोड़ना है।
रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं कन्वेंशन सेंटर में हो रही धर्म संसद का शुभारंभ हो गया है। संतों ने दीप प्रज्ज्वलित कर इसका शुभारंभ किया।
काशी की संस्कृति संसद में देशभर के विभिन्न मठों, पीठों, अखाड़ों और धार्मिक संप्रदायों से जुड़े संत-महात्मा एवं धर्माचार्य शामिल हो रहे हैं। सभी संसद में पहुंच गए हैं।
छह प्रमुख कार्यक्रम होंगे आकर्षण
संस्कृति संसद में मुख्य विमर्श सत्र, Gen Z Conclave, संस्कृति उत्सव, राष्ट्रीय चित्रकला प्रदर्शनी, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फोटोग्राफी प्रदर्शनी और रंगोली व बाल चित्रकला प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी।
मुख्य सभागार में रोज सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक संतों, धर्माचार्यों, विद्वानों और विशेषज्ञों के सत्र होंगे। वहीं, अलग सेमिनार हॉल में Gen Z Conclave होगा। इसमें युवा भारतीय संस्कृति से जुड़े समकालीन विषयों पर अपनी बात रखेंगे और सवाल पूछेंगे। इस कॉन्क्लेव में करीब 90 प्रतिशत वक्ता युवा होंगे।
शाम 5 से रात 9 बजे तक होगा संस्कृति उत्सव
तीनों दिन शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक संस्कृति उत्सव आयोजित होगा। इसमें लोक और शास्त्रीय संगीत, नृत्य और पारंपरिक कलाओं की प्रस्तुतियां होंगी।
चित्रकला और फोटोग्राफी प्रदर्शनियों में भारतीय सभ्यता, आध्यात्मिक परंपराओं, ऐतिहासिक धरोहरों और लोकजीवन की झलक देखने को मिलेगी। रंगोली और बाल चित्रकला प्रतियोगिताओं में बच्चे अपनी रचनात्मकता दिखाएंगे।

