कौरौ अंतरिक्ष केंद्र एक ऐसी फैसिलिटी है, जिसका इस्तेमाल यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और फ्रांसीसी सरकार के उपग्रहों को अंतरिक्ष में लॉन्च करने के लिए किया जाता है। फ्रांस की सरकार ने 1964 में यहां से उपग्रह की लॉन्चिंग शुरू की। 1975 में यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के गठन के बाद इसे उसके साथ साझा करने की पेशकश की गई। ईएसए हर साल इसके बजट में दो तिहाई का योगदान देता है। इसका इस्तेमाल अमेरिका, जापान, कनाडा, भारत और ब्राजील समेत अन्य देश भी करते हैं।
कहां पर है स्टेशन
दुनिया के कई अन्य लॉन्च साइट की तरह कौरौ भूमध्य रेखा के पास स्थित है। ईएसए का कहना है कि इसका अक्षांश 5 डिग्री 3 मिनट उत्तर में है। यूरोपीय स्पेस एजेंसी का कहना है कि यह उन मिशनों को लॉन्च के लिए एक अच्छा स्थान बनाता है जो भूमध्य रेखा पर या उसके पास से संचालित होंगे। इससे ईंधन और धन की बचत होती है। फ्रेंच गुयाना एक हल्की आबादी वाला देश हैं। देश का लगभग 90 फीसदी हिस्सा मानव बस्तियों की जगह जंगलों से घिरा हुआ है। यह ऐसे इलाके में है, जो भूकंप या तूफान से ग्रस्त नहीं है।
भारत को मिली कामयाबी
भारत ने जुलाई में चंद्रयान-3 मिशन लॉन्च किया था। इस मिशन में चंद्रयान-3 के हाल पर नासा, यूरोपीय स्पेस एजेंसी और इसरो तीनो ही मिलकर काम कर रहे थे। चंद्रमा की सतह पर 23 अगस्त को चंद्रयान का विक्रम लैंडर सफलतापूर्वक उतरा। ऐसा करने वाला भारत दुनिया का चौथा देश बना। चंद्रयान दक्षिणी ध्रुव पर उतरा था और ऐसा करने वाला भारत पहला देश बना है। मिशन पूरा होने के बाद 4 सितंबर की सुबह 8 बजे इसे स्लीप मोड में भेज दिया गया। इसके पेलोड निष्क्रिय कर दिए गए। हालांकि इसका रिसीवर चालू था।











