बालों का झड़ना कई लोगों के लिए चिंता का विषय होता है। कभी बालों की मांग चौड़ी होने लगती है, कभी कंघी करते समय पहले से ज्यादा बाल निकलते हैं, तो कभी सिर के बाल पतले दिखाई देने लगते हैं। अक्सर लोग इसके लिए तनाव, खानपान या हेयर केयर प्रोडक्ट्स को जिम्मेदार मानते हैं, लेकिन इसकी एक वजह थायरॉइड हार्मोन्स में गड़बड़ी भी हो सकती है। थायरॉइड गर्दन के सामने मौजूद एक छोटी-सी ग्रंथि है, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म यानी ऊर्जा के इस्तेमाल की प्रक्रिया को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है। इसके हार्मोन बालों के रोम यानी हेयर फॉलिकल्स के विकास और उनके ग्रोथ साइकिल को भी प्रभावित करते हैं। जब शरीर में थायरॉइड हार्मोन कम या ज्यादा बनने लगते हैं, तो बालों की सामान्य वृद्धि बाधित हो सकती है और हेयर की कमी बढ़ सकती है।

थायरॉइड हार्मोन्स और हेयर ग्रोथ साइकिल क्या कनेक्शन

बालों की वृद्धि एक प्राकृतिक चक्र के अनुसार होती है। इसे ही हेयर ग्रोथ साइकिल कहा जाता है। इसके मुख्य चरण को आगे बताया गया है।
एनाजेन फेज: यह बालों के बढ़ने का चरण है। इस दौरान हेयर फॉलिकल्स सक्रिय रहते हैं और बालों की लंबाई बढ़ती है।

  • कैटाजेन फेज: यह एक छोटा ट्राजिशन फेज है, जिसमें बालों का बढ़ना धीमा होने लगता है।

  • टेलोजेन फेज: इस चरण में बाल आराम की स्थिति में रहते हैं। इसके बाद पुराने बाल झड़ सकते हैं और उनकी जगह नए बाल उगने लगते हैं।

एनसीबीआई के अनुसार थायरॉइड हार्मोन, खासकर टी3 और टी4, हेयर फॉलिकल्स की गतिविधि और बालों की वृद्धि से जुड़ी कोशिकाओं पर असर डालते हैं। हार्मोन का स्तर सामान्य सीमा से बाहर होने पर बालों के ग्रोथ साइकिल में बदलाव आ सकता है। इससे अधिक बाल एक साथ झड़ने लग सकते हैं या बालों की मोटाई और बनावट प्रभावित हो सकती है।

हाइपोथायरॉइडिज्म में बाल ज्यादा क्यों झड़ सकते हैं?


हाइपोथायरॉइडिज्म ऐसी स्थिति है, जिसमें थायरॉइड ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में हार्मोन नहीं बना पाती। इससे शरीर की कई प्रक्रियाएं धीमी हो सकती हैं और त्वचा तथा बालों की सेहत भी प्रभावित हो सकती है। इस स्थिति में बाल सामान्य से ज्यादा झड़ सकते हैं, रूखे और बेजान हो सकते हैं या उनकी मोटाई कम होने लग सकती है। कुछ लोगों को भौंहों के बाहरी हिस्से के बाल पतले होने की समस्या भी दिखाई देती है। हालांकि, ये लक्षण केवल हाइपोथायरॉइडिज्म में ही नहीं होते, इसलिए इनसे अकेले थायरॉइड की बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती।

अमेरिकन थायरॉइज एसोसिएशन के अनुसार हाइपोथायरॉइडिज्म में बाल झड़ने के साथ थकान, वजन बढ़ना, ठंड ज्यादा लगना, कब्ज, रूखी त्वचा और सुस्ती जैसे लक्षण भी हो सकते हैं। यदि बाल झड़ने के साथ ऐसे बदलाव लगातार दिखाई दें, तो डॉक्टर से जांच कराने पर विचार करना चाहिए।

क्या हाइपरथायरॉइडिज्म भी हेयर लॉस का कारण बन सकता है?

हाइपरथायरॉइडिज्म में भी बाल झड़ सकते हैं। यह ऐसी स्थिति है, जिसमें थायरॉइड ग्रंथि जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है। शरीर की कई प्रक्रियाएं तेज हो सकती हैं और हेयर फॉलिकल्स की सामान्य गतिविधि प्रभावित हो सकती है। इसके परिणामस्वरूप बाल पतले पड़ सकते हैं या पूरे सिर से ज्यादा मात्रा में झड़ सकते हैं।

अमेरिकन थायरॉइड एसोसिएशन के अनुसार हेयर लॉस को हाइपरथायरॉइडिज्म के संभावित लक्षणों में शामिल करती है। फिर भी, बाल झड़ने की मात्रा और गंभीरता हर व्यक्ति में अलग हो सकती है। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि थायरॉइड की बीमारी के इलाज के दौरान बालों के झड़ने के पैटर्न में कुछ समय के लिए बदलाव महसूस हो सकता है।

क्या बालों का झड़ना थायरॉइड प्रोब्लम का शुरुआती संकेत हो सकता है?


कुछ मामलों में बालों का ज्यादा झड़ना थायरॉइड की समस्या का शुरुआती संकेत हो सकता है, खासकर जब इसके साथ अन्य लक्षण भी मौजूद हों। लेकिन केवल हेयर लॉस के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति को हाइपोथायरॉइडिज्म या हाइपरथायरॉइडिज्म है।

उदाहरण के लिए, अगर बाल पूरे सिर से ज्यादा झड़ रहे हैं, उनकी मोटाई कम हो रही है और साथ में थकान, वजन में बदलाव, ठंड या गर्मी के प्रति संवेदनशीलता जैसे लक्षण भी हैं, तो डॉक्टर थायरॉइड की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।

बाल झड़ने की दूसरी वजहों में आयरन की कमी, तनाव, हाल में तेज बुखार या बीमारी, प्रसव के बाद होने वाले हार्मोनल बदलाव, कुछ दवाएं, आनुवंशिक कारण और पोषण संबंधी समस्याएं शामिल हैं।

थायरॉइड हार्मोन बालों के सामान्य ग्रोथ साइकिल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हाइपोथायरॉइडिज्म और हाइपरथायरॉइडिज्म दोनों में हेयर लॉस हो सकता है, लेकिन बाल झड़ना अपने आप में थायरॉइड की बीमारी का पक्का प्रमाण नहीं है। यदि बाल झड़ने के साथ वजन, ऊर्जा, त्वचा या शरीर के तापमान से जुड़े बदलाव भी दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेकर जांच कराएं।