सरल व्यक्तित्व के धनी रतन टाटा कॉरपोरेट दिग्गज थे। उन्होंने अपनी शालीनता और ईमानदारी के बूते अलग तरह की छवि बनाई थी। रतन टाटा 1962 में कॉर्नेल विश्वविद्यालय, न्यूयॉर्क से वास्तुकला में बी.एस. की डिग्री प्राप्त करने के बाद पारिवारिक कंपनी में शामिल हो गए।
उन्होंने शुरुआत में एक कंपनी में काम किया और टाटा समूह के कई व्यवसायों में अनुभव प्राप्त किया। इसके बाद 1971 में उन्हें (समूह की एक फर्म) ‘नेशनल रेडियो एंड इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी’ का प्रभारी निदेशक नियुक्त किया गया।
टाटा ग्रुप का दुनिया में बजा डंका
यह वह साल था जब भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को खोला और 1868 में कपड़ा और व्यापारिक छोटी फर्म के रूप में शुरुआत करने वाले टाटा समूह ने शीघ्र ही खुद को एक ‘वैश्विक महाशक्ति’ में बदल दिया। इसका परिचालन नमक से लेकर स्टील, कार से लेकर सॉफ्टवेयर, बिजली संयंत्र और एयरलाइन तक फैला गया था।
विदेश में किए कई अधिग्रहण
परोपकार के कारण कभी अरबपतियों की दौड़ में नहीं रहे
वर्ष 1970 के दशक में उन्होंने आगा खान अस्पताल और मेडिकल कॉलेज परियोजना की शुरुआत की। इसने भारत के प्रमुख स्वास्थ्य सेवा संस्थानों में से एक की नींव रखी। अपनी परोपकारी गतिविधियों के कारण ही वह कभी अरबपतियों की दौड़ में नहीं दिखाई दिए।











