बचपन में देखी गरीबी
कुछ बड़ा करने की चाहत में छोड़ी नौकरी
अंकुश का जन्म 13 दिसंबर, 2000 को बंगाणा में हुआ था। उन्होंने अपनी पढ़ाई राजकीय सीनियर सेकेंड्री स्कूल बंगाणा से पूरी की। साल 2011 में घर की स्थिति में तब सुधार शुरू हुआ जब अंकुश के पिता रिटेल आउटलेट की नौकरी छोड़कर व्यवसाय में शामिल हो गए। अंकुश कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट हैं। नौकरी लगने पर उन्हें 26.28 लाख रुपये सालाना का पैकेज मिला। लेकिन, कुछ बड़ा करने की चाहत में उन्होंने यह नौकरी छोड़ दी। उन्होंने खुद का व्यवसाय शुरू करने का फैसला लिया। साल 2020 में अंकुश ने 'दीवा' की शुरुआत की। यह एक ऐसा मार्केटिंग प्लेटफॉर्म है जो देशभर के साड़ी निर्माताओं को सीधे ग्राहकों से जोड़ता है।
ऐसे आया आइडिया
दरअसल, अंकुश जब हैदराबाद की एक कंपनी में सेल्स और मार्केटिंग की नौकरी कर रहे थे, उन्हीं दिनों में काम के सिलसिले में उनकी मुलाकात एक साड़ी निर्माता से हुई। वह 300 रुपये में साड़ियां बेच रहे थे। उनसे बात करने के बाद उन्हें समझ आया कि जहां निर्माता 300 रुपये में साड़ी बनाते हैं, वहीं उसी को देश में 1,000 रुपये में बेचा जाता है। इसके बाद ही अंकुश ने अपना कारोबार शुरू करने का फैसला किया था। 'दीवा' के जरिये देशभर में करीब 60 प्रकार की साड़ियों की बिक्री की जाती है। कंपनी का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। इसका सालाना कारोबार करीब पांच करोड़ रुपये का है।
शार्क टैंक में छा गए
कंपनी में अंकुश के साथ 100 से ज्यादा लोग काम करते हैं। इनमें ज्यादातर युवा हैं। अंकुश का मानना है कि युवाओं को रोजगार देना भी उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि है। शार्क टैंक इंडिया शो में 'दीवा' की सफलता ने कंपनी को एक नई पहचान दिलाई है। शो में आने के बाद कंपनी की वेबसाइट पर ट्रैफिक बढ़ गया। 'दीवा' को शो में तीन जजों ने निवेश करने की पेशकश की।











