लोकसभा ने गुरुवार को टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल 2026 पास किया, जिसमें पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट 2007 के सेक्शन 10 में बदलाव करने का प्रस्ताव है। यह बिल सरकार को UPI और रूपे कार्ड से होने वाले ट्रांजैक्शंस पर जीरो-MDR की व्यवस्था में बदलाव करने का कानूनी आधार देता है। अभी बैंक और पेमेंट सर्विस देने वाली कंपनियां UPI और रूपे डेबिट कार्ड के जरिए पेमेंट के लिए यूजर्स से कोई चार्ज नहीं ले सकती हैं।
अभी नहीं हुआ है फैसला
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस पर कहा, यह विधेयक MDR लगाने का रास्ता खोलता है, जिसे भविष्य में आसानी से सभी प्रकार के डिजिटल भुगतान पर लागू किया जा सकता है। इसका बोझ आम लोगों पर पड़ेगा। सीतारमण ने कांग्रेस नेता के बयान पर कहा, 'अफवाह फैलाने से पहले इन बातों पर ध्यान देना चाहिए। MDR केवल मर्चेंट्स पर लागू होता है, यूजर्स या कंस्यूमर्स पर नहीं। अभी NPCI की अगुवाई वाली UPI एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमिटी ने MDR पर फैसला भी नहीं किया है। संसद से संशोधन विधेयक पास होने के बाद ही इस बारे में कोई फैसला होगा।'वहीं, राज्यसभा ने गुरुवार को विनियोग विधेयक को मंजूरी दे दी, जिसके तहत सरकार ने वित्त वर्ष 2022-23 में व्यय हुए अतिरिक्त खर्च के लिए संसद से मंजूरी मांगी थी।
लेकिन, अगर ट्रस्ट न्यू टैक्स रीजीम चुन लेता था, तो निवेशकों को मिलने वाली टैक्स की यह छूट खत्म हो जाती थी। अब REIT या InvIT न्यू टैक्स रीजीम में भी है, तब भी निवेशकों को मिलने वाला डिविडेंड टैक्स-फ्री होगा। वहीं, सेबी के गुरुवार को जारी प्रस्ताव के तहत REITs और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvITs) को अब निर्माणाधीन संपत्तियों में छोटी हिस्सेदारी खरीदने की अनुमति मिल सकती है।
