वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को लोकसभा में कहा कि MDR केवल मर्चेंट्स पर लागू होता है, यूजर्स या कंस्यूमर्स पर नहीं। अभी NPCI की अगुवाई वाली UPI एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमिटी ने MDR पर फैसला भी नहीं किया है। संसद से संशोधन विधेयक पास होने के बाद ही इस बारे में कोई फैसला होगा। माना जा रहा है कि 2,000 रुपये से ऊपर के बिजनेस पेमेंट पर 0.25% से 0.4% तक चार्ज लगाया जा सकता है।
क्या है एमडीआर?
एमडीआर वह फीस होती है जो बैंक और पेमेंट प्रोसेसिंग कंपनियां हर क्रेडिट और डेबिट ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट से वसूलती हैं। फाइनेंस मिनिस्ट्री के मुताबिक यूपीआई पेमेंट की कुल वैल्यू में पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) की हिस्सेदारी 29 फीसदी है। अब अगर 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर एमडीआर वसूला जाता है तो करीब 67 फीसदी P2M इसके दायरे में आ जाएंगे। जुलाई के आंकड़ों के हिसाब से यह राशि 5,80,568 करोड़ रुपये बैठती है।जुलाई में यूपीआई ट्रांजैक्शंस की टोटल वैल्यू 29.88 लाख करोड़ रुपये थी। हिंदू बिजनेसलाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर इसे पूरे साल के लिए लागू किया जाए तो 2,000 रुपये से अधिक राशि के ट्रांजैक्शन पर 0.25 फीसदी एमडीआर से 17,416 करोड़ रुपये की कमाई होगी। अगर एमडीआर को 0.5 फीसदी कर दिया तो यह राशि 34,833 करोड़ रुपये होगी। 1 फीसदी एमडीआर की सूरत में यह रकम 69,655 करोड़ रुपये पहुंच जाएगी।
