जब मुंबई की सड़कों पर 'आवारा' हो गया था रतन टाटा का कुत्ता... नीरा राडिया ने बताया पूरी कहानी

जब मुंबई की सड़कों पर 'आवारा' हो गया था रतन टाटा का कुत्ता... नीरा राडिया ने बताया पूरी कहानी
नई दिल्ली: दिग्गज उद्योगपति और परोपकारी रतन टाटा का 10 अक्टूबर को मुंबई में 86 साल की उम्र में निधन हो गया था। देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने टाटा ग्रुप के 21 साल तक चेयरमैन रहे रतन टाटा को आवारा जानवरों खासकर कुत्तों की भलाई के लिए भी जाना जाता था। उन्हें कुत्तों से काफी लगाव था। मुंबई में जब टाटा ग्रुप के मुख्यालय बॉम्बे हाउस को रेनोवेट किया गया तो उसमें आवारा कुत्तों के लिए स्पेशल शेल्टर बनाया गया। टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के लिंक्डइन पर एक पोस्ट में इसका जिक्र किया है।

चंद्रशेखरन ने कहा कि जब उन्होंने बॉम्बे हाउस को रेनोवेट करने की बात रतन टाटा को बताई तो उन्होंने पूछा कि ऑफिस के रिसेप्शन में रहने वाले आवारा डॉग किधर जाएंगे। इस पर चंद्रशेखरन ने कहा कि उनके लिए एक स्पेशल शेल्टर बनाया जाएगा। जब बॉम्बे हाउस के रेनोवेशन का काम पूरा हुआ तो टाटा सबसे पहले कुत्तों के लिए बनाई गई जगह को देखना चाहते थे। उस जगह का डिजाइन और वहां हो रही कुत्तों की देखभाल को देखकर टाटा खुश हो गए।

जब भाग गया था कुत्ता


वैष्णवी कम्युनिकेशंस की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने भी कुत्तों के प्रति रतन टाटा के लगाव के बारे में एक किस्सा साझा किया। उन्होंने एनडीटीवी प्रॉफिट से बात करते हुए कहा, 'मैं बॉम्बे में गेस्ट हाउस में थी और वहां आवारा कुत्ते थे। हम उनकी देखभाल किया करते थे। रतन टाटा के हमसे अपने कुत्ते की देखभाल करने को भी कहा। उसका नाम जैकी थी। रोज रतन टाटा का ड्राइवर कुत्ते के लिए खाना लाता था। हम भी उसे गेस्ट हाउस में खाना खिलाते थे। इससे कुछ ही दिनों में वह मोटा हो गया और हम उसे टहलाने के लिए बाहर ले जाने लगे।'

राडिया ने बताया कि एक दिन ड्राइवर उसे मरीन ड्राइवर पर टहलाने ले गया। अचानक वह भाग गया। फॉर्मल और टाई पहने चार से पांच पीआर प्रोफेशनल मरीन ड्राइव पर खोज रहे थे। उन्होंने कहा, 'यह काफी फनी दृश्य था। फिर मैंने रतन टाटा को फोन किया और कहा कि जैकी भाग गया है। हालांकि बाद में उसे खोज लिया गया।' मुंबई में आवारा जानवरों के लिए अस्पताल खोलना टाटा का सपना था। यह अस्पताल जुलाई में खुला। पांच मंजिला इस अस्पताल में लगभग 200 मरीजों के इलाज की सुविधा है।
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