बीसीएएस के सुझावों के अनुसार बम की झूठी सूचना देने वालों को पांच साल के लिए 'नो-फ्लाई' सूची में डाला जाए। साथ ही विमान अधिनियम 1934 की समीक्षा की जाए। इसमें अगस्त में लोकसभा द्वारा पारित भारतीय वायुयान विधेयक 2024 द्वारा रिप्लेस करने का प्रस्ताव है। इसका मकसद है कि झूठी धमकियों से निपटने के लिए एक विशेष कानूनी व्यवस्था प्रदान की जा सके।
फ्लाइट में बम है... फर्जी कॉल और मैसेज करने वालों की खैर नहीं, जानें सरकार क्या ले सकती है ऐक्शन
नई दिल्ली: विमान में बम की झूठी कॉल और मैसेज ने यात्रियों और एयरलाइंस के साथ एविएशन मिनिस्ट्री को भी परेशानी में डाल दिया है। मंत्रालय ने अब ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ा ऐक्शन लेने की तैयारी शुरू कर दी है। ऐसे मामलों में नागरिक उड्डयन मंत्रालय, नागरिक उड्डयन एवं सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) के पुराने सुझावों पर नए सिरे से विचार कर रहा है। इसमें धमकी देने वालों को फ्लाइट में बैन लगाने तक शामिल है।
टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर के अनुसार सूत्रों ने बताया कि बीसीएएस ने पिछले साल विमान अधिनियम में विशेष प्रावधानों को शामिल करने का सुझाव दिया था। इसका उद्देश्य झूठी धमकियों और मैसेज से अधिक सख्ती से निपटना था। इसी साल जुलाई में दिए गए इसके अन्य प्रमुख सुझाव में डीजीसीए नागरिक उड्डयन आवश्यकताओं में संशोधन करके झूठी धमकियों वाले लोगों को पांच साल के लिए 'नो-फ्लाई' सूची में डालना शामिल है।
एयरलाइंस अभी तक उन्हीं लोगों पर फ्लाइट में सफर करने पर बैन लगाती रही हैं जो विमान में सफर के दौरान या चढ़ते-उतरते समय उपद्रव मचाते हैं। यह बैन कितने दिनों का होता, यह एयरलाइन पर छोड़ दिया गया है। बीसीएएस ने कहा था कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के प्रावधान उतने प्रभावी नहीं हैं जो फर्जी कॉल और मैसेज के गंभीर असर को दूर कर सकें।
बीसीएएस ने कहा है कि फर्जी कॉल के खिलाफ विमान अधिनियम 1934 में ऐसे कई प्रावधान हैं जो फर्जी कॉल करने या बम की झूठी सूचना देने वालों को रोक सकते हैं। इनमें सख्त जमानत और कड़ी सजा शामिल है।
पिछले 6 दिनों में फ्लाइट में बम होने की करीब 70 धमकियां मिल चुकी हैं। शनिवार को ही 30 से अधिक विमानों में बम होने की धमकी मिली। इन धमकियों से एयरलाइन का भी खर्च बढ़ता है। इसके अलावा विमानों के शेड्यूल पर भी आर पड़ता है जिससे यात्री प्रभावित होते हैं।











