रिजर्व बैंक की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत नाबालिग विदेश में पैसा भेज रहे हैं। हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर के अनुसार LRS नॉर्म्स के तहत कोई भी शख्स संपत्ति खरीदने या किसी भी दूसरे उद्देश्य के लिए प्रति वर्ष 2.50 लाख डॉलर से ज्यादा रकम विदेश नहीं भेज सकता। 24 अगस्त 2022 से प्रभावी हुए संशोधन के अनुसार अगर वह उस रकम को 180 दिनों के भीतर निवेश नहीं करता है तो वह रकम वापस भारत भेजनी होगी। विदेशी निवेश पर बढ़ती जांच और नॉन-डिस्क्लोजर के लिए ब्लैक मनी एक्ट के तहत कड़े नियमों को देखते हुए हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNI) एक्सपर्ट की सलाह ले रहे हैं।
क्या था पहले नियम?
अब इस्तेमाल कर रहे यह ट्रिक
इसे ऐसे समझें
...लेकिन आईटीआर फाइल करने में भी हैं जटिलताएं
हालांकि इसमें कई जटिलताएं हैं। संघवी के अनुसार अगर कोई नाबालिग दुबई की संपत्ति का सह-मालिक (को-ऑनर) है, तो वह केवल लाभार्थी नहीं है। जबकि आयकर कानून इनकम को जोड़ने का प्रावधान करता है। हालांकि वे डिस्क्लोजर उद्देश्यों के लिए संपत्तियों को जोड़ने का प्रावधान नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला और भी जटिल हो जाता है क्योंकि टैक्स फाइलिंग प्लेटफॉर्म नाबालिग को रिटर्न दाखिल करने की अनुमति नहीं देता है, जब तक कि उसने अपने प्रयासों (जैसे, बाल कलाकार के रूप में) से आय अर्जित न की हो।
नायक बताते हैं कि नाबालिग का टैक्स रिटर्न अभिभावक के रूप में माता-पिता द्वारा दाखिल किया जाना चाहिए। उन्हें नाबालिग के खाते के माध्यम से आयकर पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा। ऐसे रजिस्ट्रेशन की अनुमति तब तक नहीं दी जाती जब तक कि नाबालिग खुद की आय होने का सर्टिफिकेट ऑनलाइन दाखिल न करे। ऐसे में यहां मामला काफी पेंचीदा हो जाता है।











