एक सूत्र ने कहा कि हल्दीराम परिवार अब मैज्योरिटी स्टेक नहीं बेचना चाहता है। अब कंपनी में माइनोरिटी स्टोक बेचने की योजना है। हल्दीराम का बिजनस अच्छा चल रहा है। यह मुनाफे में है और इससे काफी कैश मिल रहा है। 2032 तक भारत का स्नैक्स मार्केट दोगुना होकर 95,521.8 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। यही वजह है कि दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियां इस मौके को भुनाना चाहती हैं। इस बारे में हल्दीराम स्नैक्स, बेन कैपिटल और ब्लैकस्टोन ने ईमेल का जवाब नहीं दिया जबकि टेमासेक होल्डिंग्स के प्रवक्ता ने टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया।
कहां अटकी बात
हल्दीराम के नागपुर और दिल्ली गुटों का मर्जर हो चुका है जिसे कंप्टीशन कमीशन ऑफ इंडिया ने पिछले साल मंजूरी दी थी। हल्दीराम स्नैक्स फूड्स प्राइवेट लिमिटेड में हल्दीराम स्नैक्स प्राइवेट लिमिटेड की 56% और हल्दीराम फूड्स इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड (HFIPL) की 44% हिस्सेदारी है। हल्दीराम ब्रांड की शुरुआत 1937 में गंगा बिसन अग्रवाल ने की थी। आज इसका बिजनस 100 से अधिक देशों में फैला हुआ है। कंपनी 400 से अधिक तरह के फूड आइटम्स बेचती है।











