स्कूल, मॉल, रेस्तरां में अब कैसा भी फर्नीचर नहीं चलेगा, सरकार ने फायर सेफ्टी के लिए उठाए कड़े कदम

स्कूल, मॉल, रेस्तरां में अब कैसा भी फर्नीचर नहीं चलेगा, सरकार ने फायर सेफ्टी के लिए उठाए कड़े कदम
नई दिल्ली: सरकार ने मॉल, एयरपोर्ट, हॉस्पिटल, शैक्षिक संस्थानों और रेस्टोरेंट्स जैसी सार्वजनिक जगहों पर इस्तेमाल होने वाले फर्नीचर के लिए कड़े नियम लागू किए हैं। फायर सेफ्टी के लिए उठाए गए इस कदम के मुताबिक इन फर्नीचर में ऐसे फैब्रिक का ही उपयोग करना होगा, जो फायर रेजिस्टेंट हों। सरकार का प्रयास है कि इससे जीवन और संपत्ति की सुरक्षा हो सके।

टेक्सटाइल्स मिनिस्ट्री ने एक बयान में कहा कि पिछले साल अक्टूबर से क्वॉलिटी कंट्रोल ऑर्डर (QCO) के तहत अब धर्मस्थलों, म्यूजियम और अंडर-ग्राउंड शॉपिंग कॉम्प्लेक्स सहित ऐसी सभी सार्वजनिक जगहों पर इस्तेमाल होने वाले कुर्सी-सोफा की गद्दियां और फैब्रिक ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स के नियमों के मुताबिक होने चाहिए। मिनिस्ट्री के मुताबिक, QCO से जुड़ा यह नियम सार्वजनिक जगहों पर उपयोग के लिए आयात किए जाने वाले पूरी तरह तैयार फर्नीचर या उसके हिस्सों पर भी लागू होगा। हालांकि इंडस्ट्री के अनुरोध पर इसके लिए 31 मार्च 2025 तक छूट दी गई है।

सेफ्टी के उच्चतम मानकों का हो पालन


मंत्रालय ने बयान में कहा, 'सरकार सार्वजनिक जगहों पर फायर सेफ्टी सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस निर्णायक कदम में यह प्रतिबद्धता दिखती है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सभी नॉन-डोमेस्टिक फर्नीचरों में क्वॉलिटी और सेफ्टी के उच्चतम मानकों का पालन हो, जिससे जीवन और संपत्ति की सुरक्षा हो सके।'

टेक्सटाइल्स मिनिस्ट्री ने क्या कहा ?


टेक्सटाइल्स मिनिस्ट्री ने अपने बयान में कहा है, 'कई उत्पादों के लिए BIS सर्टिफिकेशन स्वैच्छिक है, लेकिन फर्नीचरों में इस्तेमाल होने वाले फैब्रिक के लिए फायर रेजिस्टेंट होना अब अनिवार्य है। यह रेगुलेशन पब्लिक स्पेस को बेहतर सुरक्षा देने और वहां इस्तेमाल होने वाले फर्नीचर के लिए सबसे ऊंचे सुरक्षा मानक सुनिश्चित करने के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम है।'
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