मामला एक ग्राहक को महज 50 पैसे वापस न करने का है। इसके लिए ग्राहक को डीओपी के खिलाफ शिकायत दर्ज करनी पड़ी। ग्राहक का कहना था की डीओपी के इस कृत्य से उन्हें मानसिक पीड़ा हुई। साथ ही उनके साथ अनुचित व्यवहार भी किया गया। आयोग ने ग्राहक की बातों को सुना और डीओपी को दोषी पाया। इसके बाद आयोग ने यह फैसला सुनाया। इसमें डीओपी को 50 पैसे वापसी के साथ-साथ 10 हजार रुपये मुआवजा और 5 हजार रुपये मुकदमे का खर्च उठाने का आदेश दिया गया।
किसने की थी शिकायत?
शिकायतकर्ता ने कहा कि हालांकि उन्होंने यूपीआई के जरिये सटीक राशि भेजने की पेशकश की। लेकिन, कुछ तकनीकी समस्याओं के कारण डाक कर्मियों ने इसे अस्वीकार कर दिया।
शिकायत में उन्होंने कहा कि रोजाना लाखों रुपये का लेनदेन होता है और उनका सही हिसाब नहीं रखने से सरकार को नुकसान भी होता है। उन्होंने इसे अवैध करार दिया जिससे उन्हें ‘गंभीर मानसिक पीड़ा’ हुई।
विभाग ने आयोग के समक्ष कहा कि तकनीकी समस्याओं के कारण उस समय उपभोक्ता से डिजिटल माध्यम से भुगतान स्वीकार नहीं किया जा सका। इसलिए उनसे नकद राशि ली गई।
आयोग ने फैसले में क्या कहा?
जिला उपभोक्ता आयोग ने डीओपी को शिकायतकर्ता को 50 पैसे वापस करने के साथ ही मानसिक पीड़ा, अनुचित व्यवहार और सेवा में कमी के लिए मुआवजे के रूप में 10 हजार रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया।
इसके अलावा, कांचीपुरम जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने डाक विभाग (डीओपी) को मुकदमे की लागत के लिए 5,000 रुपये का भुगतान करने को कहा है।
शिकायतकर्ता ने डीओपी को उसके 50 पैसे लौटाने, ‘मानसिक पीड़ा’ के लिए 2.50 लाख रुपये का मुआवजा और मुकदमे की लागत के लिए 10,000 रुपये देने का निर्देश देने का अनुरोध किया था।
शिकायतकर्ता ने डीओपी को उसके 50 पैसे लौटाने, ‘मानसिक पीड़ा’ के लिए 2.50 लाख रुपये का मुआवजा और मुकदमे की लागत के लिए 10,000 रुपये देने का निर्देश देने का अनुरोध किया था।











