दास ने कहा कि वैश्विक उतार-चढ़ाव के बावजूद मौद्रिक नीति महंगाई को काबू में रखने और आर्थिक वृद्धि को गति देने में सफल रही है। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने रुख को बदलकर तटस्थ करने का फैसला किया है। बेहतर मॉनसून, पर्याप्त बफर स्टॉक की वजह से इस साल आगे खाद्य महंगाई में कमी आएगी। महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़े अर्थव्यवस्था में मजबूत गतिविधियों के संकेत दे रहे हैं। इसकी बुनियाद मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि लचीले मौद्रिक नीति ढांचे को आठ साल पूरे हो गए हैं।
जीडीपी की रफ्तार
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। सकल घरेलू उत्पाद में निवेश का हिस्सा 2012-13 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर है। घरेलू मांग में सुधार, कच्चे माल की कम लागत और सरकारी नीतियों से विनिर्माण क्षेत्र में तेजी आ रही है। सामान्य मॉनसून के मद्देनजर वित्त वर्ष 2024-25 के लिए खुदरा मुद्रास्फीति 4.5 प्रतिशत रहने का अपना अनुमान है। प्रतिकूल आधार प्रभाव और खाद्य कीमतों में तेजी के कारण सितंबर में खुदरा महंगाई बढ़ने की आशंका है।कब मिलेगी राहत
इस महीने की शुरुआत में सरकार ने आरबीआई की एमपीसी का पुनर्गठन किया था। इसमें तीन नए बाहरी सदस्य नियुक्त किए गए थे। इस नियुक्ति के बाद एमपीसी की यह पहली बैठक थी। अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने हाल में बेंचमार्क दरों में 0.5 फीसदी कटौती की थी। साथ ही कुछ अन्य देशों के केंद्रीय बैंकों ने भी ब्याज दरों में कटौती की थी। लेकिन आरबीआई ने उनका अनुसरण नहीं किया और ब्याज दरों को यथावत बनाए रखा। विशेषज्ञों का मानना है कि दिसंबर रेपो रेट में कुछ ढील की गुंजाइश है।











