ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह दावा किया गया है। इसमें दोनों कंपनियों की 50-50 फीसदी हिस्सेदारी होगी और यह बड़ी कंपनियों से लेकर स्टार्टअप को लोन देगी। अगर यह डील आगे बढ़ती है तो यह रिलायंस और अमेरिका की ब्लैकरॉक के बीच तीसरा वेंचर होगा। इससे पहले दोनों कंपनियां एसेट मैनेजमेंट और स्टॉक ब्रोकिंग बिजनस में हाथ मिला चुकी हैं।
एशिया में प्राइवेट क्रेडिट के लिए भारत एक ब्राइट स्पॉट है। अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट, सेर्बेरस कैपिटल मैनेजमेंट एलपी और वर्डे पार्टनर्स जैसी ग्लोबल कंपनियां भारत में अपने ऑपरेशन का तेजी से विस्तार कर रही हैं। इसकी वजह यह है कि देश में लोकल कंपनियों की फंड की डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है। EY की एक रिपोर्ट के अनुसार 2024 की पहली छमाही में भारत में प्राइवेट क्रेडिट इनवेस्टमेंट रेकॉर्ड $6 अरब तक पहुंच गया है।
भारत में बड़ा दांव
ब्लैकरॉक की एपीएसी प्राइवेट क्रेडिट की प्रमुख सेलिया यान ने पिछले महीने कहा था कि भारत में छोटी-बड़ी कंपनियों को क्रेडिट देने का मौका हैं। जियो फाइनेंशियल की कमान अनुभवी बैंकर के. वी. कामथ के हाथ में है। यह कंपनी पहले से ही एक शैडो बैंक चलाती है जो म्यूचुअल फंड निवेश के अगेंस्ट होम मॉर्टगेज और क्रेडिट देता है। इस साल की शुरुआत में, ब्लैकरॉक ने भारत में अपने प्राइवेट क्रेडिट बिजनस को लीड करने के लिए महेश्वर नटराज को नियुक्त किया था।











