भोपाल। मध्य प्रदेश में निजी महाविद्यालयों के फर्जीवाड़े पर सख्ती शुरू हो गई है। इसके तहत उच्च शिक्षा विभाग ने निजी महाविद्यालयों में फर्जी फैकल्टी पर रोक लगाने ऑनलाइन भुगतान अनिवार्य कर दिया है। विभाग ने नया आदेश जारी कर कहा है कि जिन निजी महाविद्यालयों में शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को नकद वेतन दिया जाता है, उन्हें मान्यता नहीं दी जाएगी।
ऐसे कॉलेजों को नवीन संकाय शुरू करने या मान्यता की निरंतरता के लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) भी जारी नहीं होगा। मान्यता नहीं मिलने पर संबंधित विश्वविद्यालय भी कॉलेजों को संबद्धता नहीं दे सकेंगे।
विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निजी कॉलेजों को मान्यता, नवीन संकाय या निरंतरता के लिए आवेदन करते समय शिक्षकों व कर्मचारियों के वेतन भुगतान के प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे। इसके लिए बैंक स्टेटमेंट, कॉलेज की कैश बुक और कर्मचारियों की बैंक पासबुक की प्रतियां देना अनिवार्य होगा। बैंक खातों के माध्यम से वेतन भुगतान के वैध दस्तावेज नहीं देने वाले कॉलेजों के आवेदनों पर कार्रवाई की जाएगी।
पोर्टल पर अपलोड करनी होगी शिक्षकों की जानकारी
कॉलेजों को विभागीय पोर्टल पर आवेदन करते समय नियुक्त कर्मचारियों के नाम, फोटो, आधार कार्ड और विश्वविद्यालय से प्राप्त अनुमोदन पत्र की प्रतियां भी अपलोड करनी होंगी। यदि कोई कॉलेज नियमों का पालन नहीं करता या पोर्टल पर गलत जानकारी देता है, तो मामले की गंभीरता के आधार पर उस पर अधिकतम पांच लाख रुपये तक का अर्थदंड लगाया जा सकता है।
फीस निर्धारण में भी पारदर्शिता पर जोर
वर्तमान में प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति बैंक के माध्यम से किए गए भुगतानों और खर्चों के आधार पर कॉलेजों के पाठ्यक्रमों की फीस निर्धारित करती है। अब उच्च शिक्षा विभाग ने इसी व्यवस्था को आगे बढ़ाते हुए वेतन भुगतान में कैशलेस प्रणाली अनिवार्य करने पर जोर दिया है।

