ईरान को लेकर इजराइल की स्थिति किसी प्रकार का समझौता न करने वाली रही है। पहले भी उसने ईरान के परमाणु केंद्रों पर सर्जिकल हमले करने की पैरवी की थी और वह ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या में भी संलिप्त रहा है। गाजा युद्ध में ईरान का संभावित प्रवेश शत्रुओं के बीच दुश्मनी में एक नया अध्याय शुरू करेगा और युद्ध को सीधे ईरान के दरवाजे तक ले जाएगा।
क्या ईरान लड़ेगा इजरायल से युद्ध?
इजराइल को दी गयी चेतावनियों के बावजूद ऐसा लगता नहीं है कि ईरान इस संघर्ष में सीधे हिस्सा लेगा क्योंकि उसे इजराइल की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया का खतरा होगा। इसके परिणामस्वरूप ईरान अपनी वैचारिक बयानबाजी और राजनीतिक व्यवहार्यता के बीच मुश्किल संतुलन बनाए हुए हैं। लेकिन ईरान आग से खेल रहा है। ईरान का आधिकारिक रुख अतिवादी है। वह इजराइल के अस्तित्व के अधिकार को ही खारिज करता है और इसे देश नहीं, बल्कि एक यहूदी संस्था मानता है। ईरान की आधिकारिक घोषणाएं इजराइल विरोधी बयानों से भरी पड़ी हैं।जून में ईरान ने अपनी नयी मिसाइल का परीक्षण किया था और यह दावा किया कि इसमें इजराइल तक पहुंचने की क्षमता है। ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामनेई का मुखपत्र माने जाने वाले केहान डेली के मुख्य संपादक ने इजराइल के खिलाफ युद्ध की आधिकारिक घोषणा का आह्वान किया। हालांकि, प्राधिकारी अच्छी तरह जानते हैं कि इजराइल के साथ खुलकर संघर्ष उसके लिए काफी महंगा साबित हो सकता है। इससे न केवल इजराइली सेना ईरानी केंद्रों को निशाना बना सकती है, बल्कि इसका उस सरकार पर राजनीतिक असर भी पड़ सकता है जो तेजी से अपने नागरिकों के बीच ही अलोकप्रिय होती जा रही है।











