रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप की नीतियां आगे चलकर ग्लोबल ग्रोथ और सप्लाई चेन के लिए खतरा बन सकती हैं। लेकिन, अभी आरबीआई के लिए सबसे बड़ी समस्या टमाटर है। पिछले महीने टमाटर के दाम 161% बढ़ गए। इसका कारण देर से और ज्यादा बारिश होना है। आलू और प्याज के दाम भी बढ़े हैं। इसने खाने-पीने का खर्च बढ़ा दिया है। क्रिसिल के मुताबिक, अक्टूबर में घर का बना खाना (चावल, रोटी, दाल, सब्जी, सलाद, दही) पिछले 14 महीनों में सबसे महंगा हो गया है।
ब्याज दरों में कटौती की संभावना घटी
पहले टमाटर, फिर ट्रंप। दोनों ही चीजें आरबीआई के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं। आरबीआई कब और कितनी जल्दी अर्थव्यवस्था को मदद दे पाएगा, यह देखना होगा। महंगाई और आमदनी में कमी से ग्राहकों की खरीदारी कम हो रही है, खासकर बड़े शहरों में। डॉलर मजबूत हो रहा है। इस तिमाही में विदेशी निवेशकों (एफआईआई) ने भारतीय शेयर बाजार से 13 अरब डॉलर से ज्यादा निकाल लिए हैं। अगर महंगाई कम होने के बाद ग्लोबल ट्रेड वॉर छिड़ती है, तो भारतीय ब्याज दरों में कमी से पूंजी का पलायन और बढ़ सकता है।
टैरिफ की दीवारें खड़ी हुईं तो और बढ़ेगी मुश्किल
चीन के निर्यातकों पर अगर ज्यादा बुरा असर पड़ता है तो इससे भारत को फायदा हो सकता है। लेकिन, चीन अपनी मुद्रा युआन को डॉलर के मुकाबले कमजोर होने देता है तो भारत को होने वाला यह फायदा ज्यादा समय तक नहीं रहेगा।
रिपोर्ट कहती है कि व्यापार को लेकर सख्त रुख रखने वाले ट्रंप भारत को भी नहीं छोड़ेंगे। यह मानने के कई कारण हैं कि नई अमेरिकी सरकार अमेरिकी टेक कंपनियों के लिए भारत पर दबाव डालेगी।
2019 में ट्रंप ने दशकों पुरानी 'जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज' के तहत भारत से कुछ ड्यूटी-फ्री आयात में कटौती कर दी थी। इसका कारण यह था कि भारत ने अमेरिका को अपने बाजार में 'न्यायसंगत और उचित' पहुंच नहीं दी थी। यह तो बस एक छोटा सा झटका था। इस बार दांव और ऊंचे हैं।
बढ़ेगा हर तरफ से दबाव
इसके लिए 'स्टारलिंक इंक' भारत सरकार से शुल्क तय करने का अनुरोध कर रही है। भारत सरकार इस विचार से सहमत दिख रही है। लेकिन, मुकेश अंबानी और सुनील भारती मित्तल जैसे बड़े उद्योगपति इसका विरोध कर रहे हैं। वे सैटेलाइट और टेरेस्ट्रियल मोबाइल स्पेक्ट्रम के बीच समानता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिस्पर्धी नीलामी की मांग कर रहे हैं।











