दरअसल, रूस अपने हथियारों के इस्तेमाल करने और इन्हें बनाने में कई तरह की नई टेक्नॉलजी इस्तेमाल करता है। युद्ध में इस्तेमाल होने वाली टेक्नॉलजी से जुड़ी इन चीजों पर अमेरिका और सहयोगी देशों ने बैन लगा रखा है। ऐसे में रूस इन चीजों को तीसरे देशों से खरीद रहा है।
6 करोड़ डॉलर से ज्यादा का निर्यात
विदेश मंत्रालय ने कुछ कहने से किया मना
रूस तक पहुंच रही सेंसिटिव टेक्नॉलजी
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को करीब ढाई साल हो चुके हैं। इतने समय बाद भी अमेरिका और उसके सहयोगी देश रूस की लड़ाई की क्षमता को सीमित नहीं कर पाए हैं। इसमें इन्हें काफी परेशानी आ रही है।
भारत ने पेश की चुनौती
वहीं दूसरी ओर पीएम मोदी पुतिन के साथ संबंध विकसित कर रहे हैं। इन चीजों की बिक्री को बैन करने के सहयोगी प्रयासों के बावजूद भारत रूसी तेल का शीर्ष खरीदार बनकर उभरा है। अधिकारियों के अनुसार, इस बदलाव का एक मुख्य कारण यह है कि रूस ने इस तरह की तेल बिक्री से बहुत सारा रुपया जमा किया है।











