धरती का खोया महाद्वीप आर्गोलैंड 15 करोड़ साल पहले कैसे हुआ गायब, नई स्टडी में वैज्ञानिकों ने कर दिया खुलासा

धरती का खोया महाद्वीप आर्गोलैंड 15 करोड़ साल पहले कैसे हुआ गायब, नई स्टडी में वैज्ञानिकों ने कर दिया खुलासा
वॉशिंगटन: वैज्ञानिकों ने हाल ही में आर्गोलैंड नाम के एक खोए हुए महाद्वीप के रहस्य का खुलासा किया है। माना जाता है कि यह प्राचीन भू-भाग 15.5 करोड़ साल पहले पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया से अलग हो गया था। ऐसा माना जाता है कि यह दक्षिण पूर्व एशिया की ओर बढ़ते हुए लुप्त हो गया था। हालांकि नए शोध से पता चला है कि आर्गोलैंड यूं ही गायब नहीं हुआ। बल्कि टेक्टॉनिक ताकतों के कारण इसमें खिंचाव हुआ और यह टूट कर अलग हो गया। इसके अवशेष पूरे दक्षिण एशिया में बिखर गए।

ऐतिहासिक भूवैज्ञानिक सबूतों से संकेत मिलता है कि लगभग 15.5 करोड़ साल पहले एक महाद्वीप ऑस्ट्रेलिया से अलग हो गया था। इससे जुड़ा साक्ष्य ऑस्ट्रेलिया के उत्तर-पश्चिमी तट पर स्थित गहरे समुद्री बेसिन अर्गो एबिसल मैदान में पाया गया था। भारतीय उपमहाद्वीप जो 12 करोड़ साल पहले सुपरकॉन्टिनेंट गोंडवाना से अलग हो गया था वह आज भी बरकरार है। इसके विपरीत अर्गोलैंड कई टुकड़ों में बंट गया। महाद्वीप के टुकड़े कहां खत्म हुए इसे लेकर वैज्ञानिक आज भी हैरान हैं।

महाद्वीप को फिर बनाने की कोशिश

लाइव साइंस की रिपोर्ट के मुताबिक नीदरलैंड के यूट्रेक्ट विश्वविद्यालय में पृथ्वी विज्ञान के एक शोधकर्ता और इस स्टडी के प्रमुख लेखक एल्डर एडवोकाट ने कहा, 'हमें पता था कि यह ऑस्ट्रेलिया के उत्तर में कहीं होगा, इसलिए हमें दक्षिण पूर्व एशिया में इसके पाए जाने की उम्मीद थी।' गोंडवाना रिसर्च जर्नल में 19 अक्टूबर को ऑनलाइन प्रकाशित किए गए नए अध्ययन में एडवोकाट और उनके सहयोगियों ने अलग हुए महाद्वीप को फिर से बनाने का प्रयास किया।

पहले से ही टूटा था महाद्वीप

शोधकर्ताओं को इंडोनेशिया और म्यांमार के आसपास बिखरे प्राचीन भूमि के टुकड़े मिले। उन्होंने कहा कि जब इन टुकड़ों से अर्गोलैंड को वापस बनाने की कोशिश की गई तो कुछ भी फिट नहीं हुआ। इसके बाद टीम ने अर्गोलैंड की उत्तर दिशा की यात्रा का पता लगाने के लिए दक्षिण पूर्व एशिया में सबूत इकट्ठा किए। प्राचीन भूमि के बिखरे हुए टुकड़ों के बीच उन्होंने 20 करोड़ साल पहले के छोटे महासागरों के अवशेषों की खोज की। इनका निर्माण संभवतः अर्गोलैंड में दरार पड़ने से पहले हुआ। शोध में कहा गया कि हमने एक महाद्वीप को नहीं खोया बल्कि यह पहले से ही बहुत फैला और खंडित था।

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