अमेरिका के बाइडन प्रशासन ने चीन की कई वस्तुओं पर टैरिफ बढ़ाने की घोषणा की है। इनमें स्टील से लेकर सौलर सेल, लिथियम आयन बैटरी और उनके पुर्जे, इलेक्ट्रिक वीकल और मेडिकल प्रॉडक्ट्स शामिल हैं। इस टैरिफ को इस साल से 2026 तक कई चरणों में लागू किया जाना है। यही वजह है कि अमेरिका इस टैरिफ के लागू होने से पहले ज्यादा से ज्यादा सामान अमेरिका भेजना चाहता है। इस कारण चीन में कंटेनर की डिमांड अचानक बढ़ गई है। दुनियाभर से खाली कंटेनर चीन भेजे जा रहे हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं है। यमन के हूती विद्रोहियों ने अदन की खाड़ी से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाया था। इस कारण कंटेनर की दरों में तेज उछाल आई थी। लेकिन हाल के दिनों में इसमें नरमी आने लगी थी लेकिन निर्यातकों की परेशानी फिर बढ़ने लगी है।
लंबा इंतजार
फियो के डायरेक्टर जनरल अजय सहाय ने कहा कि शिपिंग लाइन्स हमारे पोर्ट्स पर आने से बच रही हैं क्योंकि उन्हें लंबा सफर करना पड़ रहा है। हालांकि सरकारी अधिकारियों का कहना है कि बुरा दौर बीत चुका है और आने वाले महीनों में कंटेनर सप्लाई में सुधार होने की संभावना है। एक अधिकारी ने कहा कि अगले छह से आठ हफ्तों में चीजों में सुधार की उम्मीद है। अनुमान के मुताबिक अप्रैल से जुलाई के बीच देश के एक्सपोर्ट में 6.6 फीसदी तेजी आई है। सरकार को इस फाइनेंशियल ईयर में इसके पॉजिटिव बने रहने की उम्मीद है।











