सूत्रों ने बताया कि प्रौद्योगिकी के प्रदर्शन के रूप में मैसेज का ट्रांसमिशन सरकारी कंपनी बीएसएनएल के नेटवर्क पर किया गया। अंतरिक्ष और पृथ्वी के बीच दो-तरफा संचार को सक्षम बनाने के लिए दिल्ली के बाहर लैंडिंग स्टेशन बनाए हैं। इस कम्युनिकेशन के लिए सैटेलाइट लिंक अमेरिका की प्रमुख सैटकॉम कंपनी वायसैट ने दिया था। यह कंपनी 'डायरेक्ट टू डिवाइस' सर्विस के लिए बीएसएनएल के साथ साझेदारी कर रही है। इससे रेगुलर स्मार्टफोन पर सैटेलाइट से मैसेज आएगा। अब तक किसी भी प्रकार के सैटेलाइट कम्युनिकेशन के लिए विशेष उपकरणों की जरूरत होती है।
अमेरिकी कंपनी का साथ
एक अधिकारी ने कहा कि इसमें अपार संभावनाएं हैं। डिवाइस इकोसिस्टम के व्यापक होने के बाद इससे कॉलिंग और ब्रॉडबैंड पर विचार किया जा सकता है। देश में लैंडिंग स्टेशन होने का मतलब यह भी है कि कानून का प्रवर्तन कराने वाली एजेंसियों के पास सैटेलाइट डिवाइस पर किसी भी प्रकार की अवैध बातचीत या मैसेजिंग तक पहुंच होगी। अमेरिका जैसे बाजारों में वायसैट पहले से ही घरों के लिए सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सॉल्यूशन दे रही है और उसका सीधा मुकाबला पारंपरिक मोबाइल ऑपरेटरों के साथ है।











