एयर इंडिया के यात्रियों की परेशानी को एक उदाहरण से समझ सकते हैं। 31 अगस्त, 2024 को मुंबई और लंदन की उड़ान संख्या AI 129 अपने निर्धारित प्रस्थान समय सुबह 5.15 बजे से लगभग नौ घंटे बाद रवाना हुई। उसी दिन मुंबई-न्यूयॉर्क फ्लाइट 12 घंटे की देरी के बाद रवाना हुई। उड़ान ट्रैकिंग साइट्स से पता चलता है कि AI 129 फ्लाइट 28, 29 और 30 अगस्त को दोपहर 2 बजे के बाद रवाना हुई। इसी तरह 23 और 24 अगस्त को यह सुबह 8 बजे के बाद रवाना हुई। देरी की सूची अंतहीन है। अपने निर्धारित प्रस्थान/आगमन समय से 15 मिनट के भीतर ऑपरेट होने वाली उड़ान को समय पर माना जाता है।
खराब रेकॉर्ड
दिल्ली से शिकागो, सैन फ्रांसिस्को और वाशिंगटन, मुंबई से मैन फ्रांसिस्को और बेंगलुरु से सैन फ्रांसिस्को जैसे कई रूट्स पर एयर इंडिया ही एकमात्र सीधी सेवा है। उत्तरी अमेरिका के लिए एयर इंडिया की सीधी उड़ानें सबसे तेज विकल्प हैं क्योंकि एयरलाइन रूस से होकर गुजरती है और सबसे छोटा रास्ता अपनाती है। इन उड़ानों में देरी से उन यात्रियों के धैर्य का बांध टूट रहा है जो एयर इंडिया के लॉयल कस्टमर हैं। OAG के अनुसार अप्रैल 2024 में भारत से इंटरनेशनल फ्लाइट्स में एयर इंडिया की हिस्सेदारी 20%, इंडिगो की 17% और एमिरेट्स की 7% थी। इस बारे में एयर इंडिया की तरफ से फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं आई।
डीजीसीए का हस्तक्षेप
टीओआई ने एयर इंडिया के खराब प्रदर्शन का कारण जानने के लिए स्टेकहोल्डर्स के एक वर्ग से बात की। इसमें इंजीनियरिंग और रखरखाव संबंधी मुद्दे सबसे कॉमन रहे। इस कारण विमानों को बार-बार ग्राउंड होना पड़ता है। स्पेयर्स की कमी और खराब क्रू प्लानिंग के कारण भी एयर इंडिया की फ्लाइट्स में देरी होती है। सूत्रों का कहना है कि एयर इंडिया ने अपनी क्षमता से अधिक उड़ानें अपने हाथ में ले ली हैं। इससे विमानों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है। कंपनी ने कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें जोड़ी हैं।
जमीनी हकीकत से दूर है मैनेजमेंट
एयर इंडिया के अंदरूनी लोगों का भी मानना है कि केवल नए विमान लाने से ये मुद्दे हल नहीं होंगे।
एयर इंडिया के निजीकरण के समय एआई इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड (AIESL) को अलग कर दिया गया था। सूत्रों ने कहा कि सिस्टम और प्रक्रियाएं लागू होनी चाहिए। हमारी लंबी दूरी की उड़ानें विमानों की अधिकतम वहन क्षमता के साथ संचालित होती हैं। यहां तक कि एक छोटी सी समस्या का मतलब है यात्रियों या सामान को पीछे छोड़ना, उड़ानों में देरी या रद्द करना। बॉम्बे हाउस (टाटा का मुख्यालय) इस मामले से अवगत है। वह स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है और पूछे जाने वाले सवाल पूछ रहा है।











