पॉपकॉर्न के लिए टाइम लेकिन इंश्योरेंस प्रीमियम के लिए नहीं... आखिर क्या है हमारी प्राथमिकता

पॉपकॉर्न के लिए टाइम लेकिन इंश्योरेंस प्रीमियम के लिए नहीं... आखिर क्या है हमारी प्राथमिकता
सरकार की जमाने में स्कूटर और ब्रेड बनाया करती थी। फिल्म रोल और होटल बनाने का काम भी उसी ने संभाला था लेकिन निजी विकल्प बेहतर थे। आम धारणा है कि निजी कंपनियां प्रतिस्पर्धा पैदा करती हैं, जो ग्राहकों के लिए अच्छा है। इसलिए यह खबर सोचने को मजबूर करती है कि एक सरकारी बीमा कंपनी अपने निजी प्रतिस्पर्धियों की तुलना में बहुत कम बार यानी 500 मामलों में 1 दावा खारिज करती है। कुल दावों में खारिज किए गए दावों के अनुपात को 'claims repudiation ratio' कहा जाता है।
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