जानें क्या है पूरा मामला
सेबी ने जनवरी 2006 से मार्च 2008 तक जांच की। इसमें पता चला कि माल्या ने अपने समूह की कंपनियों, हर्बर्टसन लिमिटेड और यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड (यूएसएल) के शेयरों का गुप्त रूप से व्यापार करने के लिए विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) मैटरहॉर्न वेंचर्स का उपयोग किया था। इन लेन-देन के लिए रकम अलग-अलग विदेशी खातों के माध्यम से भेजी गई थी। इस जांच में पता चला कि माल्या ने मैटरहॉर्न वेंचर्स का उपयोग करके भारतीय प्रतिभूति बाजार में धन भेजा था।
माल्या पर पहचान छिपाने का आरोप
जो भी लेन-देन हुए, उन्हें अंजाम देने के लिए माल्या ने अलग-अलग विदेशी संस्थाओं को नियुक्त किया था। यह इसलिए किया ताकि माल्या अपनी पहचान छिपा सकें। सेबी की मुख्य महाप्रबंधक अनीता अनूप ने अपने 37 पेज के आदेश में कहा कि इस मामले में नोटिस प्राप्तकर्ता (माल्या) ने अपनी पहचान छिपाई है। साथ ही उन्होंने नियामक मानदंडों की अवहेलना की है। अनूप ने कहा कि माल्या के ऐसे कृत्य न केवल धोखाधड़ीपूर्ण और भ्रामक हैं, बल्कि प्रतिभूति बाजार की अखंडता के लिए भी खतरा हैं।
सेबी ने जनवरी 2006 से मार्च 2008 तक जांच की। इसमें पता चला कि माल्या ने अपने समूह की कंपनियों, हर्बर्टसन लिमिटेड और यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड (यूएसएल) के शेयरों का गुप्त रूप से व्यापार करने के लिए विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) मैटरहॉर्न वेंचर्स का उपयोग किया था। इन लेन-देन के लिए रकम अलग-अलग विदेशी खातों के माध्यम से भेजी गई थी। इस जांच में पता चला कि माल्या ने मैटरहॉर्न वेंचर्स का उपयोग करके भारतीय प्रतिभूति बाजार में धन भेजा था।
माल्या पर पहचान छिपाने का आरोप
जो भी लेन-देन हुए, उन्हें अंजाम देने के लिए माल्या ने अलग-अलग विदेशी संस्थाओं को नियुक्त किया था। यह इसलिए किया ताकि माल्या अपनी पहचान छिपा सकें। सेबी की मुख्य महाप्रबंधक अनीता अनूप ने अपने 37 पेज के आदेश में कहा कि इस मामले में नोटिस प्राप्तकर्ता (माल्या) ने अपनी पहचान छिपाई है। साथ ही उन्होंने नियामक मानदंडों की अवहेलना की है। अनूप ने कहा कि माल्या के ऐसे कृत्य न केवल धोखाधड़ीपूर्ण और भ्रामक हैं, बल्कि प्रतिभूति बाजार की अखंडता के लिए भी खतरा हैं।
सेबी ने कहा- सत्य को गलत तरीके से किया प्रस्तुत
सेबी ने का कि माल्या ने सत्य को गलत तरीके से प्रस्तुत किया है और एक महत्वपूर्ण तथ्य को छिपाया है। वह जानते हैं कि मैटरहॉर्न के नाम पर दिखाई गई शेयरधारिता वास्तव में प्रमोटर श्रेणी की थी, क्योंकि इसे पूरी तरह से माल्या द्वारा वित्तपोषित किया गया था। इससे PFUTP (धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार व्यवहार निषेध) विनियमों के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ।
सेबी ने का कि माल्या ने सत्य को गलत तरीके से प्रस्तुत किया है और एक महत्वपूर्ण तथ्य को छिपाया है। वह जानते हैं कि मैटरहॉर्न के नाम पर दिखाई गई शेयरधारिता वास्तव में प्रमोटर श्रेणी की थी, क्योंकि इसे पूरी तरह से माल्या द्वारा वित्तपोषित किया गया था। इससे PFUTP (धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार व्यवहार निषेध) विनियमों के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ।











