वाशु भरद्वाज, दुर्ग I 25 दिस्मबर से शुरू हुए स्वदेशी खादी महोत्सव के संचालक गिरीशचंद दुबे ने विज न्यूज़ को बताया कि आज जीतनी कपडों की सिलाई लगती है, उस रेंज में यहां वस्त्र मिल जाते है। इसमें बिचौलियों की भूमिका नही होती है, इसके बुनकर व कारीगर स्वयं कपड़े बनाते है और वे स्वयं या उनके पुत्र व रिश्तेदार ऐसे स्वदेशी खादी महोत्सव में स्टॉल लगाकर उसका विक्रय करते है, यही कारण है कि खादी व हस्तशिल्प के बने साड़ी, सलवार सूट, शर्ट, जैकेट व अन्य सामान मार्केट के अन्य कपडों से कम दर पर मिलते है। श्री दुबे ने आगे कहा कि सरकार से खादी के वस्त्रो और हस्तशिल्प को बढावा देने के लिए सरकार से पूरा सहयोग मिल रहा है। सरकार देश में कई स्थानोंं पर कभी सिल्क मेला, कभी गांधी मेला इस प्रकार के अन्य कई नामों से मेला लगाकर खादी व सिल्क तथा हस्तशिल्प वाले वस्त्रों के बिक्री के लिए स्थान देकर हम लोगों को रोजगार का बढावा दे रही है I उन्होंने कहा कि लोग अपने परिवार के साथ आकर भारतीय पारंपरिक वस्त्र एवं परिधानों हस्तशिल्प वाले खादी के वस्त्रों सहित यहां एक से एक आयटम खरीद सकते है।
जितना कपडों की सिलाई लगती है, उस रेंज में यहां वस्त्र मिल जाते है : गिरीशचंद दुबे











