सफल बिजनेसमैन की पत्नी होना आसान नहीं
सुधा मूर्ति ने कहा कि सफल आदमी की पत्नी होना आसान नहीं है, क्योंकि एक बिजनेसमैन आम इंसान की तरह नहीं होते हैं। वो सनकी होते हैं। वो घर पर कोई लॉजिक नहीं लगाते, सारा लॉजिक सिर्फ ऑफिस में लगाते हैं। सारे तर्क ऑफिस में ही करते हैं। वो अपनी पत्नी से उम्मीद करते हैं कि वो उनकी सेक्रेटरी भी वो, फाइनेंस मैनेजर भी हो, नैनी भी हो और एजवाइजर भी हो। एक बिजनेसमैन या एंटरप्रेन्योर की पत्नी को इन सारे रोल को निभाना पड़ता है। अगर वह किसी भी एक रोल में असफल हो गई तो पति की कामियाबी पर असर पड़ता है। सुधा अपन अंदाज में ये बाते बता रही थी, सामने मौजूद लोग खूब ठहाके लगा रहे थे, तालियां बजा रहे थे। सुधा का अंदाज देखकर नारायण मूर्ति भी खुद को रोक न सके। वो भी हंसतेरहे।
यूं ही नहीं मिल जाती सफलता
सुधा मूर्ति ने कहा कि बिजनेस करना किसी तपस्या से कम नहीं है। पहले के जमाने में ऋषि जंगल में जाकर सालों तक तपस्या करते थे। उसी तरह से एंटरप्रेन्योर भी सालों की मेहनत के बाद अपना कारोबार खड़ा कर पाते हैं। उसे सब छोड़ना पड़ता है। बिजनेस जमाने में अपनी जवानी, अपनी सारी टेंशन अपना सबकुछ कंपनी और कारोबार में चला जाता है। इन सबके के बाद भी पत्नी को पति से ज्यादा मजबूत रहना पड़ता है। पति ऑफिस और कारोबार में ज्यादा मजबूत हो सके, इसके लिए पत्नी को ज्यादा मजबूत होना पड़ता है। एक एंटरप्रेन्योर या कारोबारी की पत्नी को अपने पति की बातों पर भरोसा करना पड़ता है।
गौरतलब है कि नारायण मूर्ति पहले भी कई बार अपनी सफलता का श्रेय अपनी पत्न सुधा मूर्ति को दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि जब मैंने नौकरी से इस्तीफा दिया और घर लौटा तो मैंने सुधा से कहा कि मैंने नौकरी छोड़ दी। सुधा ने हमेशा की तरह मुस्कुरा कर कहा, कोई बात नहीं हमारे पास जो है उसी साधन में कर लेंगे। जिस मुश्किल से नारायण मुर्ति से इंफोसिस की शुरुआत की सुधा ने उसने उनका पूरा साध दिया।











