बलूचिस्तान के बिना पाकिस्तान का मिट जाएगा वजूद, सैन्य ताकत के नशे में अपनी ही 'आत्मा' का कर रहा कत्ल

बलूचिस्तान के बिना पाकिस्तान का मिट जाएगा वजूद, सैन्य ताकत के नशे में अपनी ही 'आत्मा' का कर रहा कत्ल
इस्लामाबाद: बलूचिस्तान के लोगों ने कल यानि 11 अगस्त को धूम धाम से अपना स्वतंत्रता दिवस मनाया है। बलूचों ने पाकिस्तान से आजादी का ऐलान कर दिया है और देश के ज्यादातर हिस्से से कब्जे वाली पाकिस्तानी सेना की पकड़ काफी कमजोर हो चुकी है। इसीलिए सवाल ये उठ रहे हैं कि आखिर बलूचिस्तान के बिना पाकिस्तान का वजूद क्या बचेगा? इस सवाल का पहला उत्तर ही यही है कि करीब आधा पाकिस्तान ही एक झटके में खत्म हो जाएगा। पाकिस्तान के कुल क्षेत्रफल का 43.6 प्रतिशत हिस्सा बलूचिस्तान है यानी देश का लगभग आधा हिस्सा।

बलूचिस्तान में प्राकृतिक गैस, तांबा, सोना, कोयला और दूसरे खनिज भी भरपूर मात्रा में हैं। साथ ही इसकी तटरेखा और ग्वादर की वजह से पाकिस्तान को बहुत ज्यादा रणनीतिक महत्व मिलता है। फिर भी यह प्रांत पाकिस्तान का सबसे कम आबादी वाला और आर्थिक रूप से सबसे पिछड़े इलाकों में से एक है। यहां संसाधन तो बहुत हैं लेकिन इस बात को लेकर लगातार शिकायतें रहती हैं कि उन पर किसका नियंत्रण है, उनसे किसे फायदा होता है और वहां रहने वाले लोगों को कितना लाभ मिलता है।

बलूचिस्तान के बिना पाकिस्तान का वजूद हो जाएगा खत्म!

पाकिस्तान से अलग बलूचिस्तान एक सांस्कृतिक धरोहर भी है। यहां बलोच, ब्राहुई, पश्तून और दूसरे समुदाय मिलकर ऐसी विविधता बनाते हैं जिसे सिर्फ आंकड़ों में नहीं समेटा जा सकता। लेकिन आज इनकी पहचान पर पाकिस्तानी सेना कहर बरपा रही है। विद्रोह, हमले, लोगों का जबरदस्ती गायब किया जाना और बिना कानूनी प्रक्रिया के हत्याओं के बाद पाकिस्तानी सेना से लोगों का भरोसा खत्म हो चुका है।

इस्लामाबाद के लिए यह बात चिंता का विषय होनी चाहिए। क्योंकि जब गायब हुए पुरुषों के लिए न्याय की मांग करने वाली माताओं, बहनों और बेटियों की आवाज सबसे ज्यादा सुनाई देती है तो यह संकट सिर्फ सुरक्षा का मामला नहीं रह जाता। यह वैधता का सवाल बन जाता है। फिर भौगोलिक स्थिति की बात भी है। बलूचिस्तान की सीमाएं ईरान, अफगानिस्तान और अरब सागर से लगती हैं जिससे पाकिस्तान दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व और मध्य एशिया के बीच एक अहम चौराहे पर स्थित हो जाता है।

बलूचिस्तान के बिना पाकिस्तान क्या है?

बलूचिस्तान के हटने से पाकिस्तान एक रणनीतिक इलाके, संसाधन, रणनीतिक गहराई और अपनी पहचान का एक बड़ा हिस्सा खो देगा। लेकिन इससे भी गहरा सवाल यह है कि बलूचिस्तान के साथ पाकिस्तान क्या बन गया है। कोई देश सिर्फ सीमाओं के दम पर नहीं टिक सकता। उसे अपने लोगों का भरोसा जीतना होता है। और पाकिस्तान इसमें पूरी तरह से नाकाम रहा है। वो बलूचों के लिए एक देश नहीं बन पाया। मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टों के मुताबिक बलूचिस्तान में लापता लोगों का मुद्दा एक नासूर बन चुका है। आवाज उठाने वाले युवाओं, छात्रों और पत्रकारों का गायब हो जाना वहां एक खौफनाक आम बात हो गई है।
इसीलिए जब कोई देश अपने ही नागरिकों को 'दुश्मन' या 'दूसरे दर्जे का नागरिक' समझने लगे तो वह सिर्फ अपनी जमीन ही नहीं बल्कि अपनी राष्ट्रीय आत्मा भी खोने लगता है। पाकिस्तान का निर्माण एक खास विचारधारा के तहत हुआ था लेकिन बलूचिस्तान के साथ उसका सुलूक यह साबित करता है कि वह अपने ही लोगों को एक सूत्र में पिरोने में नाकाम रहा है और इसीलिए कल जब स्वतंत्रता दिवस का दिन था तो बलूचों ने आजादी का जश्न मनाकर पूरे पाकिस्तान को संदेश दे दिया है कि जरा सोच कर देखो कि बलूचिस्तान के बिना पाकिस्तान का वजूद क्या बचेगा।
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