जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और पूर्व राजदूत तौकीर हुसैन ने डॉन में लिखे अपने लेख में कहा है कि एक्टिविस्ट के शरीफ और मोदी को लिखे पत्र का कोई फायदा नहीं होगा। हुसैन ने संबंधों में खराबी का ठीकरा भारत के सिर फोड़ते हुए कहा है कि दोनों देशों के तनावपूर्ण रिश्तों के पीछे नरेंद्र मोदी सरकार की नीति है। यह इस्लामाबाद के लिए भारत के नकारात्मक रुख को दिखाती है, जिसमें बदलाव का कोई संकेत नहीं है।
'सिंधु संधि को हथियार बना रहे मोदी, तनाव की सबसे बड़ी वजह', भारतीय दूत ने खोली पोल तो बौखलाए पाकिस्तानी एक्सपर्ट
इस्लामाबाद: बीते साल अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्ते निचले स्तर पर हैं। एक साल से ज्यादा की तनातनी के बाद ऐसी आवाजें सामने आई हैं, जो बातचीत और संबंधों में बेहतरी पर जोर दे रही हैं। पिछले महीने भारत और पाकिस्तान के 117 एक्टिविस्ट और पूर्व अधिकारियों ने नरेंद्र मोदी और शहबाज शरीफ को खुला खत लिखा है। इसमें दोनों प्रधानमंत्रियों से बातचीत शुरू करने की अपील की गई है। इस सबसे बीच पाकिस्तानी एक्सपर्ट का कहना है कि दिल्ली के रवैये की वजह से संबंधों में कड़वाहट है। उन्होंने सारी 'गड़बड़' के लिए भारत पर दोष मढ़ते हुए कहा है कि नरेंद्र मोदी सरकार की नीति पाकिस्तान विरोध की है।
जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और पूर्व राजदूत तौकीर हुसैन ने डॉन में लिखे अपने लेख में कहा है कि एक्टिविस्ट के शरीफ और मोदी को लिखे पत्र का कोई फायदा नहीं होगा। हुसैन ने संबंधों में खराबी का ठीकरा भारत के सिर फोड़ते हुए कहा है कि दोनों देशों के तनावपूर्ण रिश्तों के पीछे नरेंद्र मोदी सरकार की नीति है। यह इस्लामाबाद के लिए भारत के नकारात्मक रुख को दिखाती है, जिसमें बदलाव का कोई संकेत नहीं है।
जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और पूर्व राजदूत तौकीर हुसैन ने डॉन में लिखे अपने लेख में कहा है कि एक्टिविस्ट के शरीफ और मोदी को लिखे पत्र का कोई फायदा नहीं होगा। हुसैन ने संबंधों में खराबी का ठीकरा भारत के सिर फोड़ते हुए कहा है कि दोनों देशों के तनावपूर्ण रिश्तों के पीछे नरेंद्र मोदी सरकार की नीति है। यह इस्लामाबाद के लिए भारत के नकारात्मक रुख को दिखाती है, जिसमें बदलाव का कोई संकेत नहीं है।
