मप्र. बजट विश्लेषण- ‘रेवड़ी’ के रेशमी जाल से निकलने की मोहनी पहल

मप्र. बजट विश्लेषण- ‘रेवड़ी’ के रेशमी जाल से निकलने की मोहनी पहल
भोपाल। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा प्रस्तुत राज्य के वर्ष 2025-26 के बजट में जहां अधोसरंचना विकास, स्वास्थ्य और शिक्षा पर ज्यादा खर्च सरकार की बुनियादी विकास की इच्छाशक्ति दिखती है, वहीं पिछले विस चुनाव में गेम चेंजर बनी लाडली लक्ष्मी जैसी रेवड़ी कल्चर योजनाअोंके रेशमी जाल से बड़ी खूबसूरती से बाहर निकलने की चाहत भी परिलक्षित होती है। रेशमी इसलिए क्योंकि इनमें महिलाअों के वोट तो मिल रहे हैं, सत्ता भी हासिल हो रही है, लेकिन उससे आर्थिकी में भारी सेंध भी लग रही है। यानी राज्यों की आर्थिक सेहत के लिए नकदी बांटने की ये योजनाएं अब नासूर बनने लगी है। यही वजह है कि मप्र सहित अन्य राज्यों में भी लाडली बहना, लाडकी बहीण, लाडो बहना जैसी नारी लुभावन योजनाअों से किनारा करने की कोशिश शुरू हो चुकी है। चुनावी वादों के बाद भी किसी राज्य ने इस राशि में इजाफा नहीं किया है। उल्टे उसकी पात्रता सीमा में कटौतियां जरूर शुरू कर दी है ताकि कम से कम पैसा देना पड़े। वित्त मंत्री द्वारा पेश बजट में भी यही स्पष्ट संकेत है। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने लाडली बहना योजना का बजट पिछले वर्ष की तुलना में घटा दिया है। हालांकि बहनो को हर माह दिए जाने वाले 1250 रू. की राशि में कोई कटौती नहीं की गई है, लेकिन विस चुनाव में इस राशि को बढ़ाकर 3 हजार रू. करने के वादे से की भी कन्नी काट ली गई है। इसका बड़ा कारण तो सरकारी खजाने पर बढ़ता बोझ है। सरकार तकरीबन हर माह कर्ज लेती जा रही है। बजट की 7 प्रतिशत राशि इन कर्जों के ब्याज भुगतान में ही जाने वाली है। बजट में कहा गया है कि सरकार अब लाडली बहना योजना को अटल पेंशन योजना से जोड़ेगी। यह पेंशन योजना दरअसल एक अंशदान योजना है, जिसमें हर लाभार्थी को एक निश्चित राशि जमा करनी होगी। कुछ समय तक सरकार भी इसमें अंशदान देगी। उसके बदले में लाभार्थी को कम से कम 1 हजार उससे कुछ अधिक राशि पेंशन के रूप में ‍िमलेगी। यही वजह है कि बजट में लाडली बहना योजना के लिए 18 हजार 669 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। जो पिछले वर्ष के बजट में 18 हजार 984 करोड़ की तुलना में 215 रू. करोड़ कम है। हालांकि वित्त मंत्री ने यह भी कहा ‍िक अब लाडली बहना हितग्राहियों को अटल पेंशन योजना के अलावा केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन सुरक्षा योजना से भी जोड़ा जाएगा।
उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने बुधवार को विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 4 लाख 21 हजार 32 करोड़ रुपए का बजट पेश किया। अपने एक घंटे 32 मिनट के बजट भाषण में वित्त मंत्री ने कोई नया कर तो नहीं लगाया, लेकिन पुराने टैक्सों में राहत भी नहीं दी। उन्होंने कहा कि हमने 2025-26 का बजट ‘जीरो वेस्ट बेस्ड’ प्रक्रिया से तय किया है। समग्रता में देखें तो मोहन यादव सरकार का यह दूसरा बजट विकासोन्मुखी और रोजगार को बढ़ावा देने वाला है। सरकार ने 3 लाख रोजगार देने का ऐलान किया है। ये रोजगार नए विकसित हो रहे 39 औद्योगिक क्षेत्रों में मिलेंगे। अगर इस पर समय सीमा मं  और ईमानदारी से अमल हुआ तो प्रदेश के बेरोजगारों के लिए बड़ी राहत होगी। इसके अलावा छात्रों के लिए पहले से चल रही लैपटॉप योजना के लिए 220 करोड़ और साइकिल के लिए 215 करोड़ का प्रावधान बजट में किया गया है।  
प्रदेश के साढ़े 7 लाख सरकारी कर्मचारियों के भत्तों के पुनरीक्षण का ऐलान कर वित्त मंत्री ने बड़ी राहत दी है। ये बदलाव 13 साल बाद हो रहा है, जिसमें सभी भत्ते 7 वें वेतनमान के आधार पर दिए जाएंगे। वित्त मंत्री ने बजट में 11 नए आयुर्वेदिक कॉलेज और अस्पताल तथा 22 नए आईटीआई खोले जाएंगे। इसी प्रकार उज्जैन सिंहस्थ के लिए 2000 करोड़ रुपए का प्रावधान है। वित्त मंत्री ने गाय और गोपालक का ध्यान रखा है। सरकार दूध उत्पादक किसानों को प्रति लीटर 5 रुपए बोनस देगी। गोशालाओं में गायों के आहार के लिए सहायता प्रति गाय 20 रुपए से बढ़ाकर 40 रुपए प्रतिदिन की गई है।
खास बात यह है कि सरकार मानती है कि अगर अधोसंरचना विकसित हो जाए तो विकास की गाड़ी खुद-ब-खुद रफ्तार पकड़ लेती है और यह सोच सही भी है और मप्र जैसे राज्य की पहली जरूरत भी है। लिहाजा बजट की सर्वाधिक 17 फीसदी राशि का अधोसंरचना विकास पर खर्च की जाएगी। इसी तरह मानव विकास सूचकांक के आधारभूत कारक  स्वास्थ्य पर 12 और शिक्षा पर 11 प्रतिशत राशि खर्च होगी। इसके अलावा नगरीय व ग्रामीण विकास पर 12 फीसदी और कृषि क्षेत्र पर 9 फीसदी खर्च  सरकार के इस संकल्प को दर्शाता है कि वो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 2047 के विकसित भारत के संकल्प को विकसित मध्यप्रदेश के रूप में क्रियान्वित करना चाहती है।  
-अजय बोकिल ,  लेखक
- संपादक 

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