एजेंसी ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, डीटीसीपी के पूर्व निदेशक त्रिलोक चंद गुप्ता, एमार एमजीएफ लैंड लिमिटेड और 14 अन्य कॉलोनाइजर कंपनियों के खिलाफ सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के बाद अपनी जांच शुरू की। यह मामला भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 (एलए अधिनियम) की धारा 4 के तहत अधिसूचना जारी करवाकर किसानों, आम लोगों, हरियाणा सरकार और हुडा को धोखा देने से जुड़ा है। आरोप है कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 6 के तहत अधिसूचना जारी होने से पहले किसानों को प्रचलित दर से कम कीमत पर जमीन बेचने के लिए मजबूर किया गया। ईडी ने आगे आरोप लगाया कि आरोपी पक्षों ने धोखाधड़ी और बेईमानी से अधिसूचित भूमि पर आशय पत्र (LOI) और लाइसेंस प्राप्त किए। इससे किसानों, जनता और राज्य सरकार को नुकसान हुआ।
क्या है मामला
हरियाणा सरकार ने जून 2009 में गुरुग्राम में सेक्टर 58 से 63 और 65 से 67 तक की 1417.07 एकड़ भूमि पर एलए अधिनियम की धारा 4 के तहत अधिसूचना जारी की थी। इसके बाद, 31 मई, 2010 को 1417.07 एकड़ भूमि में से लगभग 850.10 एकड़ भूमि पर धारा 6 के तहत अधिसूचना लागू की गई। अप्रैल 2009 में, एम्मार प्रॉपर्टीज पीजेएससी, दुबई और एमजीएफ डेवलपमेंट्स लिमिटेड के जॉइंट वेंचर यानी एम्मार एमजीएफ लैंड ने गुरुग्राम के सेक्टर 65 और 66 में आवासीय प्लॉटेड कॉलोनी विकसित करने के लिए लाइसेंस प्राप्त करने हेतु 112.46 एकड़ के लिए LC-1 आवेदन किया था। इसके बाद, धारा 4 के तहत अधिसूचित 70.406 एकड़ भूमि को डीटीसीपी द्वारा अधिग्रहण की कार्यवाही से मुक्त कर दिया गया था और हरियाणा सरकार की आंतरिक सहमति के बाद मई 2010 में कंपनी को 108.006 एकड़ भूमि के लिए LOI प्रदान किया गया था।नवंबर 2019 में एम्मार एमजीएफ लैंड को लाइसेंस दिया गया था। ईडी ने दावा किया है कि उसकी जांच से पता चला है कि एम्मार एमजीएफ लैंड ने 27.306 एकड़ भूमि के लिए किसानों के साथ छह एंटे-डेटेड डेवलपमेंट एग्रीमेंट एक्जीक्यूट कर दिए थे। कंपनी का दावा था कि ये एग्रीमेंट अप्रैल 2009 में एक्जीक्यूट किए गए थे जबकि इन्हें मार्च 2010 में एग्जीक्यूट किया गया था। दोनों कंपनियों के अलग होने के बावजूद एम्मार एमजीएफ लैंड में एम्मार इंडिया की 60 फीसदी और एमजीएफ की 40 फीसदी हिस्सेदारी है।











