हालांकि, भारत ने पिछले एक दशक में गरीबी कम करने के मामले में बड़ी प्रगति की है। इसके बावजूद देश में लोगों की आय बढ़ाना और बेहतर रोजगार उपलब्ध कराना अब भी बड़ी चुनौती है।
रोजाना खपत करीब 951 रुपये
विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले 10% लोगों के समूह में शामिल होने की सीमा 2021 की खरीदारी क्षमता के हिसाब से करीब 10 डॉलर यानी 951 रुपये प्रतिदिन है। वहीं अमेरिका, कनाडा, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में सबसे कम खर्च करने वाले 10% लोगों का रोजाना उपभोग भी करीब 25 से 31 डॉलर यानी 2,377 से 2,948 रुपये के बराबर है।दूसरी ओर, भारत के सबसे गरीब 10% लोगों का रोजाना उपभोग करीब 3 डॉलर यानी 285 रुपये प्रति व्यक्ति है। इससे पता चलता है कि भारत में अपेक्षाकृत अच्छी कमाई करने वाले लोगों और अमीर देशों के गरीब तबके के जीवन स्तर में भी बड़ा अंतर है। हालांकि, इन आंकड़ों की तुलना करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि अलग-अलग देशों में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें अलग होती हैं।
हर देश में नहीं होती बराबर खरीदारी
जानकारों के मुताबिक अलग-अलग देशों में आय और जीवन स्तर की सीधी तुलना करने की कुछ सीमाएं हैं। इसकी वजह यह है कि एक ही रकम से हर देश में समान मात्रा में सामान और सेवाएं नहीं खरीदी जा सकतीं।उदाहरण के लिए, अमेरिका में मैकडॉनल्ड्स का एक बर्गर करीब 5 डॉलर यानी करीब 500 रुपये का हो सकता है, जबकि भारत में इसकी कीमत 150 से 200 रुपये के बीच हो सकती है। ऐसे में सिर्फ कमाई के आंकड़ों से दोनों देशों के लोगों के जीवन स्तर का सही अंदाजा लगाना मुश्किल है।
13 साल में तेजी से घटी गरीबी
विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, भारत में प्रतिदिन 3 डॉलर की गरीबी सीमा से नीचे रहने वाली आबादी का हिस्सा 2011-12 में 27.1% था। 2023-24 में यह घटकर 2.6% रह गया।वहीं, प्रतिदिन 4.2 डॉलर यानी करीब 400 रुपये की निम्न-मध्यम आय वाली गरीबी सीमा से नीचे रहने वाले लोगों का अनुपात इसी अवधि में 57.7% से घटकर 16.1% रह गया। इस बदलाव के साथ करीब 50 करोड़ लोग इस सीमा से ऊपर आए। हालांकि, इसके बावजूद करीब 23.3 करोड़ भारतीय अब भी 4.2 डॉलर प्रतिदिन की इस सीमा से नीचे जीवन बिता रहे हैं।



