इलॉन मस्क की कंपनी स्टारलिंक ने कहा है कि वह भारत में हाई-स्पीड सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक बयान शेयर करते हुए बताया कि वह पिछले 5 सालों से भारतीय रेगुलेटर्स, इंडस्ट्री और ऑपरेटर्स के साथ मिलकर काम कर रही है।
इससे पहले इलॉन मस्क ने भारत में लाइसेंस मिलने में हो रही देरी को लेकर रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी पर सीधा हमला बोला था। मस्क की बयानबाजी के बाद रिलायंस ने शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान जारी किया था। इसमें रिलायंस ने साफ किया था कि भारत में कानून का राज है और सभी आवेदकों के लिए एक ही प्रक्रिया लागू होती है।
मस्क का आरोप- 'क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं
स्टारलिंक के बयान से पहले एलोन मस्क ने X पर रिलायंस और मुकेश अंबानी को लेकर लगातार कई विवादित पोस्ट किए थे। 7 अक्टूबर को मस्क ने बिना किसी का नाम लिए लिखा कि कुछ भारतीय कारोबारी स्टारलिंक के अप्रूवल को रोक रहे हैं, जो भारत की जनता के खिलाफ अपराध है।
इसके अगले ही दिन मस्क ने सीधा हमला बोलते हुए मुकेश अंबानी पर तंज कसा। मस्क ने लिखा- "क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं? स्टारलिंक को दुनिया के 165 से ज्यादा देशों में लाइसेंस मिला हुआ है और हम 5 साल से भारत सरकार के हर कानून का पालन कर रहे हैं, फिर भी अब तक लाइसेंस क्यों नहीं मिला?" मस्क ने एक अन्य पोस्ट में अंबानी को 'प्राइम मिनिस्टर अंबानी' तक कह दिया और आरोप लगाया कि वे अपनी एकाधिकार बनाए रखना चाहते हैं।
रिलायंस का पलटवार- 'नियम सबके लिए समान
मस्क के आरोपों का जवाब देते हुए रिलायंस ने बयान जारी किया था। रिलायंस ने कहा कि हाल ही में रिलायंस और भारतीय बाजार को लेकर की गई टिप्पणियों को लेकर हम सही तथ्य रिकॉर्ड पर रखना चाहते हैं। हर भारतीय एंटरप्राइज की तरह रिलायंस भी एक ऐसे भारत में आगे बढ़ी है, जो निवेश और इनोवेशन का स्वागत करता है चाहे वह घरेलू हो या अंतरराष्ट्रीय
रिलायंस ने आगे कहा कि भारत सरकार जैसा कि कह चुकी है, वह हर आवेदक के लिए चाहे वह भारतीय हो या विदेशी, एक ही प्रक्रिया लागू करती है। खुद जिओ की सैटेलाइट सर्विसेज भी अभी अप्रूवल और क्लीयरेंस का इंतजार कर रही हैं।"
रिलायंस- हम कॉम्पिटिशन से नहीं डरते
स्टारलिंक का कॉम्पिटिशन में स्वागत करते हुए रिलायंस ने कहा कि वह कॉम्पिटिशन से कभी नहीं घबराती। कंपनी ने अपने बयान में कहा कि हम सैटेलाइट कम्युनिकेशन में स्टारलिंक समेत सभी कंपनियों के कॉम्पिटिशन का स्वागत करते हैं। जिओ समेत हर प्लेयर को भारत के लोगों की सेवा करनी चाहिए और देश के कानूनों और नीतियों का पालन करना चाहिए।
संचार मंत्रालय की सफाई- नियम सब के लिए बराबर
मस्क के सोशल मीडिया पर बयानबाजी शुरू करने के बाद भारत के संचार मंत्रालय ने भी इस मुद्दे पर स्थिति साफ की थी। मंत्रालय ने मस्क का सीधे तौर पर नाम लिए बिना कहा कि भारत का सैटेलाइट कम्युनिकेशन फ्रेमवर्क पूरी तरह से निष्पक्ष है।
स्टारलिंक- हमारा इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह तैयार
रिलायंस और सरकार के बयानों के बीच स्टारलिंक ने अपनी तैयारी को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। स्टारलिंक ने X पर लिखा कि हमने 5 सालों तक भारत में रेगुलेटर्स और इंडस्ट्री के साथ मिलकर काम किया है। हमने आवश्यक सरकारी अनुमतियों के साथ देश के भीतर ही गेटवे और डेडिकेटेड सिस्टम बनाए हैं ताकि भारतीय यूजर्स का डेटा सुरक्षित रहे।
कंपनी का कहना है कि उसका इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह तैयार है और लाइसेंस मिलते ही वह भारत के दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंचाने के लिए तुरंत सेवाएं शुरू कर सकती है।
सरकार बोली स्टारलिंक सहित 3 कंपनियों को लाइसेंस दिए
'इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026' में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सरकार का रुख साफ किया। उन्होंने बताया कि देश में तीन सैटेलाइट इंटरनेट कंपनियों को लाइसेंस मिल चुके हैं।
1. रिलायंस जियो सैटकॉम
2. भारती एयरटेल सपोर्टेड यूटेलसेट वनवेब
3. इलॉन मस्क की स्टारलिंक
हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि लाइसेंस पाने वाली इन सभी कंपनियों की सिक्योरिटी क्लीयरेंस अभी बाकी है। इसके अलावा सैटेलाइट स्पेक्ट्रम का प्राइसिंग फ्रेमवर्क भी तय किया जा रहा है। सभी जरूरी शर्तें पूरी होने के बाद ही भारत में ये सेवाएं शुरू हो सकेंगी।
- स्पेक्ट्रम का आवंटन- सैटेलाइट इंटरनेट चलाने के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी यानी स्पेक्ट्रम की जरूरत होती है। सरकार को तय करना होता है कि कंपनियों को यह कैसे मिलेगा और इसके लिए कितना पैसा देना होगा। जियो चाहती थी कि स्पेक्ट्रम की नीलामी हो, जबकि एयरटेल और वनवेब चाहती थीं कि सरकार इसे सीधे आवंटित करे। आखिरकार सरकार ने टेलीकम्युनिकेशन एक्ट, 2023 के तहत सीधे आवंटन का रास्ता चुना।
- सुरक्षा और निगरानी- सरकार यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि स्टारलिंक भारतीय कानूनों का पालन करे। जरूरत पड़ने पर एजेंसियां नेटवर्क पर नजर रख सकें, कानूनी प्रक्रिया के तहत बातचीत या डेटा को इंटरसेप्ट कर सकें और सुरक्षा से जुड़े निर्देश लागू करा सकें। सैटेलाइट इंटरनेट में डेटा का रास्ता सामान्य मोबाइल नेटवर्क से अलग हो सकता है, इसलिए सरकार के लिए इन नियमों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है



