रिलायंस के पब्लिक होने के लगभग 50 साल बाद उनके अरबपति बेटे मुकेश और पोते आकाश अब समूह की टेलीकॉम और डिजिटल सेवाओं वाली इकाई को लिस्ट कराने की तैयारी में हैं। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) होने जा रहा है। जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड इस IPO के जरिए करीब 3.2 अरब डॉलर जुटाने की योजना बना रही है। इश्यू 21 अक्टूबर को खुलेगा। यह IPO बताएगा कि रिटेल निवेशकों के लिए रिलायंस ब्रांड की अहमियत आज भी कितनी है।
धीरूभाई के समय से बिल्कुल अलग बाजार
जियो जिस बाजार को टारगेट कर रही है, वह धीरूभाई के समय के बाजार से बिल्कुल अलग है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, भारत में अब 13 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड शेयर बाजार निवेशक हैं। इनमें से लगभग 40% की उम्र 30 साल से कम है। आज उनके पैसे को आकर्षित करने के लिए हजारों स्टॉक, कई तरह के म्यूचुअल फंड और अन्य निवेश विकल्प मौजूद हैं। पुराने शेयरधारक रिलायंस को एक ऐसे स्टॉक के रूप में देखते थे जिसे वे दशकों तक अपने पास रख सकते थे। वहीं, युवा निवेशकों के लिए निवेश का फैसला लेते समय ग्रोथ, मुनाफा और वैल्यूएशन ज्यादा मायने रखते हैं।69 वर्षीय महेंद्र छेड़ा ने 1960 के दशक के आखिर में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के सदस्य बनने से पहले एक फ्लोर ट्रेडर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा, 'चाहे धीरूभाई की महत्वाकांक्षा हो, रिटेल निवेशकों की बड़ी फौज खड़ी करने की उनकी कोशिश हो या शेयरधारकों को पूंजी पर रिटर्न देना हो - रिलायंस ने खुद को सबसे अलग साबित किया।'
उनके 44 वर्षीय बेटे हार्दिक, जो खुद एक इक्विटी ट्रेडर हैं, जियो को लेकर कुछ अलग नजरिया रखते हैं। उन्होंने कहा, 'लिस्टिंग के तुरंत बाद मैं अपना मुनाफा निकाल लूंगा। रिटेल निवेशकों को सीधे तौर पर शेयर खरीदने का चलन लोकप्रिय बनाने के लिए अंबानी परिवार का बहुत आभारी होना चाहिए, लेकिन अब हम वित्तीय बाजारों के एक बिल्कुल अलग दौर में हैं।'
उनके 44 वर्षीय बेटे हार्दिक, जो खुद एक इक्विटी ट्रेडर हैं, जियो को लेकर कुछ अलग नजरिया रखते हैं। उन्होंने कहा, 'लिस्टिंग के तुरंत बाद मैं अपना मुनाफा निकाल लूंगा। रिटेल निवेशकों को सीधे तौर पर शेयर खरीदने का चलन लोकप्रिय बनाने के लिए अंबानी परिवार का बहुत आभारी होना चाहिए, लेकिन अब हम वित्तीय बाजारों के एक बिल्कुल अलग दौर में हैं।'
तब जुटाए थे IPO से 2.8 करोड़ रुपये
मुकेश अंबानी के नेतृत्व में रिलायंस टेक्सटाइल और केमिकल बनाने वाली कंपनी से आगे बढ़कर भारत की सबसे मूल्यवान कंपनी बन गई है। इसका कारोबार अब एनर्जी, कंज्यूमर गुड्स और टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों में फैला हुआ है। धीरूभाई, जो पहली पीढ़ी के उद्यमी थे और जिन्होंने मुंबई के स्थापित औद्योगिक ढांचे को चुनौती दी थी, उन्होंने अपने टेक्सटाइल साम्राज्य को खड़ा करने के लिए हजारों व्यक्तिगत निवेशकों से पूंजी जुटाने का फैसला किया।रिलायंस की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 1977 में आए IPO से 2.8 करोड़ रुपये जुटाए गए। इसमें लगभग 58,000 निवेशकों ने हिस्सा लिया। इस IPO को सात गुना सब्सक्रिप्शन मिला। इसने भारत में 'इक्विटी कल्चर' (शेयर बाजार में निवेश के चलन) को बढ़ावा दिया। कारण है था कि अधिक परिवारों ने सीधे शेयर खरीदना शुरू कर दिया। शेयरधारकों की वार्षिक बैठकें विशाल जनसभाओं में बदल गईं। ऐसी ही एक बैठक 1980 के दशक के मध्य में दक्षिण मुंबई के कूपरेज फुटबॉल ग्राउंड में आयोजित की गई थी।
गुरुवार को मुंबई में आयोजित एक रोडशो की प्रस्तुति के अनुसार, लिस्टिंग के बाद से रिलायंस के शेयरों ने औसतन लगभग 29% का सालाना रिटर्न दिया है। हालांकि, इस साल स्थानीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली के चलते रिलायंस के शेयरों में 23% की गिरावट आई है। इस वजह से 2011 के बाद से यह कंपनी के लिए सबसे खराब वार्षिक प्रदर्शन साबित हो सकता है।
गुरुवार को मुंबई में आयोजित एक रोडशो की प्रस्तुति के अनुसार, लिस्टिंग के बाद से रिलायंस के शेयरों ने औसतन लगभग 29% का सालाना रिटर्न दिया है। हालांकि, इस साल स्थानीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली के चलते रिलायंस के शेयरों में 23% की गिरावट आई है। इस वजह से 2011 के बाद से यह कंपनी के लिए सबसे खराब वार्षिक प्रदर्शन साबित हो सकता है।
IPO परखेगा युवा निवेशकों का मिजाज
मुकेश अंबानी के बड़े बेटे और जियो प्लेटफॉर्म्स के 34 वर्षीय मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश अंबानी कंपनी की लिस्टिंग प्रक्रिया का नेतृत्व कर रहे हैं। रिलायंस में यह उनका पहला बड़ा स्वतंत्र कामकाज है।मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के अनुसार, पहले यह उम्मीद की जा रही थी कि जियो लगभग 11 ट्रिलियन रुपये (116 अरब डॉलर) का वैल्यूएशन मांगेगा। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लोबल रोडशो के दौरान फंड मैनेजरों ने सवाल उठाया कि जियो को अपने छोटे प्रतिद्वंद्वी भारती एयरटेल लिमिटेड की तुलना में अधिक प्रीमियम क्यों मिलना चाहिए। साथ ही, उन्होंने यह भी पूछा कि कंपनी अपने मुख्य टेलीकॉम कारोबार के अलावा डिजिटल सेवाओं से कमाई कैसे करेगी।
मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि जियो को 20 अरब डॉलर से अधिक की बोलियां मिली हैं। इसमें फिडेलिटी मैनेजमेंट एंड रिसर्च, एलियांज SE और कैपिटल ग्रुप जैसे विदेशी निवेशकों ने भी दिलचस्पी दिखाई है।
इतनी मांग होने के बावजूद जियो अपने शेयर 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर के भाव पर बेचेगा। इस कीमत दायरे के ऊपरी स्तर पर कंपनी का वैल्यूएशन लगभग 108 अरब डॉलर बैठता है। यह भारती एयरटेल के 125 अरब डॉलर के मार्केट वैल्यूएशन की तुलना में कम (डिस्काउंट पर) है।
24 वर्षीय प्रथमेश गोखले का कहना है कि उनके लिए अंबानी परिवार की विरासत से कहीं ज्यादा मायने जियो की ग्रोथ की संभावनाएं और उसका वैल्यूएशन रखता है। वह इस IPO में बोली लगाने की योजना बना रहे हैं।
इतनी मांग होने के बावजूद जियो अपने शेयर 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर के भाव पर बेचेगा। इस कीमत दायरे के ऊपरी स्तर पर कंपनी का वैल्यूएशन लगभग 108 अरब डॉलर बैठता है। यह भारती एयरटेल के 125 अरब डॉलर के मार्केट वैल्यूएशन की तुलना में कम (डिस्काउंट पर) है।
24 वर्षीय प्रथमेश गोखले का कहना है कि उनके लिए अंबानी परिवार की विरासत से कहीं ज्यादा मायने जियो की ग्रोथ की संभावनाएं और उसका वैल्यूएशन रखता है। वह इस IPO में बोली लगाने की योजना बना रहे हैं।
उन्होंने कहा, 'अगर मुझे शेयर अलॉट हो जाते हैं तो मैं तुरंत मुनाफा कमाने के लिए शॉर्ट टर्म में अपनी आधी होल्डिंग बेच दूंगा। बाकी को लंबे समय के फायदे के लिए अपने पास रखूंगा।' वह भारती एयरटेल को भी निवेश के एक अच्छे विकल्प के रूप में देखते हैं।
अकाउंटेंसी की पढ़ाई कर रहे गोखले का कहना है कि सीमित पूंजी होने के कारण अन्य निवेशों के लिए पैसे खाली रखना बहुत जरूरी हो जाता है।
अकाउंटेंसी की पढ़ाई कर रहे गोखले का कहना है कि सीमित पूंजी होने के कारण अन्य निवेशों के लिए पैसे खाली रखना बहुत जरूरी हो जाता है।
अब निवेशकों के पास कई विकल्प मौजूद
भारत में IPO निवेशकों के बीच यह सोच काफी आम है। मार्केट रेगुलेटर की 2024 की एक स्टडी के अनुसार, रिटेल निवेशकों ने लिस्टिंग के एक हफ्ते के भीतर ही अपने अलॉट किए गए शेयरों का 40% हिस्सा बेच दिया। जब रिटर्न 20% से ऊपर पहुंच गया तो उन्होंने अपने शेयरों का लगभग दो-तिहाई हिस्सा बेच दिया।एक दशक पहले जब जियो ने सस्ती 4G डेटा सेवाओं के साथ भारतीय टेलीकॉम बाजार में कदम रखा तो इसने पूरे बाजार को बदल कर रख दिया। SPTulsian.com की इन्वेस्टमेंट एडवाइजर गीतांजलि केडिया के अनुसार, अब सवाल यह है कि क्या जियो लगातार नए इनोवेशन करके ग्रोथ के अगले चरण को हासिल कर पाएगी।
उन्होंने कहा, 'निवेशक अब कहीं अधिक समझदार हो गए हैं। कंपनियों को उनका ध्यान और पैसा पाने के लिए लगातार रिटर्न देना होगा।'



