गौरतलब है कि GST काउंसिल ने ऑनलाइन गेमिंग, घुड़दौड़, कैसीनो के लिए पूरे अंकित मूल्य पर 28 फीसदी GST लगाने का फैसला किया है। हालांकि यह फैसला करीब ढाई साल के विचार-विमर्श के बाद किया गया है। पहले राज्य इसके लिए तैयार नहीं थे। गोवा जैसे राज्य ने तो इस पर टैक्स बढ़ाने का खुलकर विरोध किया था। मगर बाद में सब राज्य मान गये। साल 2022 तक भारत में ऑनलाइन गेमिंग का मार्केट 135 अरब रुपये था, जो साल 2025 तक 231 अरब रुपये हो सकता है। भारत में ऑनलाइन गेम खेलने वालों की संख्या 50 करोड़ से अधिक है।
नेगेटिव असर तो होगा ही
फेडरेशन ऑफ इंडियन फेंटेसी स्पोर्ट्स (FIFS) के डीजी जॉय भट्टाचार्य का कहना है यह समय ऐसा जब सरकार को हर सेक्टर को बूस्ट करना चाहिए। टैक्स दरों को कम या तर्कसंगत करना चाहिए, मगर सरकार एकदम उल्टा कर रही है। ऑनलाइन गेमिंग में दोनों गेम पर ज्यादा टैक्स से किसी को फायदा नहीं होगा। उल्टा कारोबार कम होगा। जब कारोबार में गिरावट आएगी तो निश्चित तौर पर कंपनियों पर मैन पावर कम करने का दबाव बढ़ेगा।
आखिर क्यों है परेशानी?
आखिर क्यों है परेशानी?
GST एक्सपर्ट निखिल गुप्ता के अनुसार मौजूदा समय में ऑनलाइन गेमिंग के तहत दो तरह के गेम होते हैं। एक गेम ऑफ चांस और दूसरा गेम ऑफ स्किल होता है। एक गेम ऑफ चांस में 28 फीसदी टैक्स लगता है और फेस वैल्यू पर लगता है। मगर गेम ऑफ स्किल में 18 फीसदी टैक्स लगता था। काउंसिल के ताजा फैसले के बाद दोनों गेम में टैक्स के स्तर पर कोई फर्क नहीं रह जाएगा। यानी ऑनलाइन गेमिंग महंगा हो जाएगा।











