यह रिपोर्ट अगले महीने सैन फ्रांसिस्को में एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग शिखर सम्मेलन के मौके पर शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन की आपेक्षित मीटिंग से एक महीने पहले आई है। हर साल जारी यह रिपोर्ट पेंटागन की तरफ से चीन की बढ़ती सैन्य ताकत को मापने का तरीका है। हालांकि 7 अक्टूबर को इजरायल पर हमास के हमले के बाद एक बार फिर अमेरिका का पूरा ध्यान मिडिल ईस्ट में केंद्रित हो गया है।
परमाणु हथियारों का जखीरा बढ़ा रहा चीन, 2030 तक बनाएगा 1000 न्यूक्लियर बम, अमेरिका की रिपोर्ट ने दुनिया को डराया
बीजिंग: चीन खुद को दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति बनाना चाहता है। इसके लिए वह 2030 तक 1000 परमाणु हथियार बनाने में लगा है। पेंटागन की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन अपनी मिलिट्री पावर बढ़ा रहा है। इसके साथ ही वह लगातार अपनी परमाणु क्षमता बढ़ाने में लगा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रूस-यूक्रेन युद्ध से चीन सीख रहा है, ताकि वह समझ सके कि ताइवान का संघर्ष कैसा हो सकता है। गुरुवार को जारी रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि चीन एक नई अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल प्रणाली विकसित कर सकता है, जिसमें पारंपरिक हथियारों का ही इस्तेमाल होगा। इससे चीन अमेरिका को निशाने पर लेने की धमकी दे सकता है।
किसके पास कितने हथियार
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुताबिक रूस के पास 5,889 परमाणु हथियार हैं। वहीं अमेरिका के पास 3,750 एक्टिव परमाणु हथियार हैं। 2021 में अमेरिका के रक्षा मंत्रालय का अनुमान था कि चीन के पास 400 वारहेड हैं। पिछले साल की रिपोर्ट की बात करें तो उसमें कहा गया था कि चीन 2035 तक 1,500 परमाणु हथियार बना लेगा। शी जिनपिंग का लक्ष्य है कि चीन की सेना 2049 तक सबसे ज्यादा ताकतवर हो।
