पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी से सवाल किया गया कि शेख हसीना के बेटे साजिब वाजेद ने ढाका में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के दखल का आरोप लगाया है। इस पर ताहिर ने कहा कि बांग्लादेश की राजनीतिक पार्टियों के आपसी आरोपों से पाकिस्तान को कोई मतलब नहीं है। पाकिस्तान उनके अंदरुनी मामले में दखल नहीं देगा। जहां तक शेख हसीना या उनके बेटे की बात है तो भारत से नजदीकी की वजह से वह ऐसी बात कर रहे हैं।
हसीना के बेटे ने क्या कहा है
शेख हसीना के अमेरिका में रहने वाले बेटे साजिब ने 5 अगस्त को वर्चुअल प्रेस मीट में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की ISI को बांग्लादेश में खुली छूट मिली हुई है। साजिब ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) का बांग्लादेश में काफी ज्यादा प्रभाव है।साजिब ने प्रेस मीट में बोलते हुए कहा कि पाकिस्तान की ISI बांग्लादेश में काम कर रही है। हमारी सरकार में गिरफ्तार किए गए सैकड़ों मिलिटेंट रिहा हो गए हैं। यह भारत और दुनिया के लिए एक समस्या है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के फैसलों से आतंकवादियों का अगला ग्रुप बांग्लादेश से आ सकता है।बांग्लादेश ने क्या कहा है
शेख हसीना की नई दिल्ली में मीडिया से की गई बातचीत से बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार नाखुश है। बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय ने बुधवार देर रात एक बयान जारी कर पूर्व पीएम हसीना को भगोड़ा करार देते हुए उनके बयानों से दोनों देशों के संबंधों को नुकसान पहुंचाने की बात कही है।बांग्लादेश सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि फरार व जनसंहार करने वाली शेख हसीना को नई दिल्ली में मीडिया से लाइव बातचीत करने की अनुमति दी गई, जहां उन्होंने और उनके सहयोगियों ने बांग्लादेश और उसके लोगों के खिलाफ जहरीला हमला बोला।पिछले दो साल से भारत में हैं।शेख हसीना का बयान
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बुधवार को कहा कि वह दिसंबर में भारत में अपने निर्वासन से देश लौटने की योजना बना रही हैं, भले ही उन्हें 2024 में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई के मामले में बांग्लादेश में मौत की सजा का सामना करना पड़ रहा हो।नई दिल्ली में अपनी सरकार को गिराने वाले विद्रोह की दूसरी वर्षगांठ के मौके पर एक कार्यक्रम में ऑडियो संदेश के जरिए हसीना ने कहा कि मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोपों में अपनी गैर-मौजूदगी में दोषी ठहराए जाने के बावजूद अपनी मर्जी से लौटना अपने लोगों के प्रति उनका कर्तव्य है।
