फेस्टिवल सीजन में बैंक दे सकेंगे ज्यादा पैसा , मिल सकते हैं कई ऑफर्स

फेस्टिवल सीजन में बैंक दे सकेंगे ज्यादा पैसा , मिल सकते हैं कई ऑफर्स
मुंबई: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ऑफ इंडिया ने बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी को कम करने के लिए अगस्त की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी में I-CRR (Incremental Cash Reserve Ratio) पर जो फैसला लिया था, उससे चरणबद्ध तरीके से वापस लेने का फैसला लिया है। गौरतलब है कि RBI की ओर से 19 मई को 2000 रुपये के नोट को बंद करने के फैसले के बाद घरेलू बैंकों में लिक्विडिटी बढ़ गई थी और इसे कंट्रोल करने के लिए RBI ने ICRR की शुरुआत की थी। अब शनिवार से इसे चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। RBI ने कहा कि वह I-CRR को पूरी तरह से वापस लेगा। RBI के फैसले से बैंकिंग शेयरों में अच्छी खासी हलचल तेजी देखी गई। फैसला आने के बाद कई बड़े बैंकिंग शेयरों में अच्छा उछाल दिखा।

क्या होगा फायदा

बैंकिंग एक्सपर्ट हेमंत राठी के अनुसार त्योहारी सीजन में I-CRR को हटाने से बैंक अपने ग्राहकों को ज्यादा कर्ज दे सकेंगे। त्योहारी सीजन में बैंक नए-नए ऑफर्स के साथ कार लोन-होम लोन आदि के जरिए कर्ज देते हैं और लिक्विडिटी आसान होने से वे यह आसानी से कर सकेंगे। डिमांड को पूरी करने के लिए उन्हें इंटरेस्ट रेट बढ़ाने के जरूरत भी नहीं पड़ेगी।

क्या कहा RBI ने

RBI ने कहा कि उसने फैसले की समीक्षा की और लिक्विडिटी की स्थिति को देखते हुए ही यह फैसला किया है कि I-CRR को धीरे-धीरे वापस लिया जाए। RBI ने कहा, 'यह सही होगा कि I-CRR के तहत जितना अडिशनल कैश रिजर्व लॉक था, उसे धीरे-धीरे रिलीज किया जाए। ताकि मनी मार्केट में ऑपरेशन सही से चलता रहे और सिस्टम लिक्विडिटी को अचानक कोई झटका न लगे। RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने अगस्त पॉलिसी का ऐलान करते हुए कहा था कि ज्यादा लिक्विडिटी प्राइस, फाइनैंशल स्टेबिलिटी के लिए खतरा है। ऐसे में अतिरिक्‍त नकदी को सिस्‍टम से हटाने के लिए I-CCR का नियम 12 अगस्त से लागू किया गया। RBI ने बैंकों को 19 मई-28 जुलाई 2023 के बीच NDTL (नेट डिमांड टाइम लायबिलिटी) में अतिरिक्‍त 10 फीसदी I-CRR मेंटेन करने को कहा था।
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