चौंकाने वाले हैं आंकड़े
रिपोर्ट में आंकड़े चौंकाने वाले हैं। भारत के लगभग तीन-चौथाई कामगार यानी करीब 38 करोड़ लोग, ऐसे कामों में लगे हैं जहां उन्हें सीधे गर्मी का सामना करना पड़ता है। इनमें खेती-बाड़ी, कंस्ट्रक्शन वर्क और असंगठित क्षेत्र शामिल हैं। इसकी भारत की जीडीपी में लगभग आधी हिस्सेदारी रखते हैं।यह ट्रेंड चिंताजनक है। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि 2030 तक ही 20 करोड़ तक भारतीयों को जानलेवा गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। यह इस बात को दिखता है कि खतरा कितनी तेजी से बढ़ रहा है।
सबसे खतरनाक संकट का 'अदृश्य' होना
रिपोर्ट एक सीधा-सपाट आकलन पेश करती है: 'अत्यधिक गर्मी के प्रभाव बिखरे हुए, धीरे-धीरे जमा होने वाले और ऐसे अदृश्य होते हैं कि सरकारें और वित्तीय प्रणालियां जिस तरह से नुकसान का आकलन करती हैं, उसमें ये पकड़ में ही नहीं आते।'
सबसे खतरनाक संकट का 'अदृश्य' होना
- इस संकट को जो बात खास तौर पर खतरनाक बनाती है, वह है इसका अदृश्य होना।
- बाढ़ या तूफान के उलट गर्मी रातों-रात किसी बुनियादी ढांचे को तबाह नहीं करती।
- इसके बजाय यह धीरे-धीरे प्रोडक्टिविटी, हेल्थ, और इनकम को कमजोर करती जाती है।
रिपोर्ट एक सीधा-सपाट आकलन पेश करती है: 'अत्यधिक गर्मी के प्रभाव बिखरे हुए, धीरे-धीरे जमा होने वाले और ऐसे अदृश्य होते हैं कि सरकारें और वित्तीय प्रणालियां जिस तरह से नुकसान का आकलन करती हैं, उसमें ये पकड़ में ही नहीं आते।'











