गर्मियों में या किसी भी मौसम में थोड़ी देर चलने-फिरने के बाद जांघों के ऊपरी हिस्से (Groin) में पसीना आना सामान्य है। लेकिन कुछ लोगों को इस हिस्से में इतना पसीना आता है कि अंडर गारमेंट गीला हो जाता है, त्वचा पर चिपचिपापन महसूस होता है और बार-बार कपड़े बदलने की जरूरत पड़ती है। यह परेशानी गर्म और उमस भरे मौसम में ज्यादा हो सकती है, लेकिन कभी-कभी ठंडे वातावरण या आराम करते समय भी अत्यधिक पसीना आता है।
जांघों के बीच पसीना आने के पीछे शरीर को ठंडा रखने की प्राकृतिक प्रक्रिया, त्वचा के आपस में रगड़ने, नमी बनना, कपड़ों और कुछ मामलों में हाइपरहाइड्रोसिस (Hyperhidrosis) जैसी स्थिति की भूमिका हो सकती है। लगातार नमी रहने से खुजली, जलन, रैश और संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है।
जांघों के बीच शरीर के दूसरे हिस्सों से ज्यादा पसीना क्यों आता है?
शरीर में पसीना बनाने वाली एक्राइन ग्लैंड्स लगभग पूरे शरीर में मौजूद होती हैं। इनका मुख्य काम पसीने को त्वचा की सतह पर लाकर शरीर का तापमान नियंत्रित करने में मदद करना है। गर्मी, व्यायाम, तनाव और उमस के कारण इनकी गतिविधि बढ़ सकती है।
मेडलाइन प्लस के मुताबिक जांघों के ऊपरी हिस्सा (ग्रोइन) शरीर की त्वचा के फोल्ड वाले स्थान में आता है। यहां दोनों जांघें एक-दूसरे के करीब रहती हैं, जिससे हवा का प्रवाह कम हो सकता है और पसीना आसानी से सूख नहीं पाता। इस वजह से कुछ लोगों को यह हिस्सा शरीर के अन्य भागों की तुलना में अधिक गीला या चिपचिपा महसूस होता है।
गर्मी, उमस और त्वचा के घर्षण कैसे बढ़ाते हैं ग्रोइन में पसीना?
जांघों के ऊपरी हिस्से में पसीने की समस्या में मौसम और त्वचा के बीच होने वाला घर्षण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब तापमान बढ़ता है, तो शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए ज्यादा पसीना बनाता है। वहीं, उमस के कारण पसीना जल्दी वाष्पित नहीं हो पाता, जिससे त्वचा देर तक नम रह सकती है।
इसके अलावा, चलने, दौड़ने, साइकिल चलाने या लंबे समय तक पैदल रहने के दौरान जांघों की त्वचा बार-बार एक-दूसरे से रगड़ खाती है। टाइट जींस, सिंथेटिक अंडरवियर और हवा को कम गुजरने देने वाले कपड़े भी गर्मी और नमी को फंसा सकते हैं। इससे पसीने के कारण होने वाली परेशानी अधिक महसूस हो सकती है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, चाफिंग यानी त्वचा का रगड़ से छिलना उन हिस्सों में आम है जहां त्वचा आपस में संपर्क में आती है, जैसे जांघों के अंदरूनी हिस्से और ग्रोइन। गर्मी और नमी से यह समस्या बढ़ सकती है।
कब ग्रोइन में पसीना आना सामान्य है और कब हाइपरहाईड्रोसिस का संकेत हो सकता है?
अमेरिकन एकेडमी ऑफर डर्मोटोलॉजी एसोसिएशन के अनुसार गर्मी में, व्यायाम के बाद या लंबे समय तक चलने पर जांघों के बीच पसीना आना आम बात है। लेकिन यदि पसीना बार-बार जरूरत से ज्यादा आए, कपड़े भिगो दे या रोजमर्रा की गतिविधियों में परेशानी पैदा करे, तो इसके कारण को समझना जरूरी है।
हाइपरहाइड्रोसिस मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है:
प्राइमरी हाइपरहाइड्रोसिस: इसमें शरीर के कुछ हिस्सों में बिना किसी स्पष्ट कारण के जरूरत से ज्यादा पसीना आता है। यह अक्सर बगल, हथेलियों, तलवों या चेहरे पर होता है। कुछ मामलों में दूसरे हिस्से भी प्रभावित हो सकते हैं।
सेकेंडरी हाइपरहाइड्रोसिस: इसमें अत्यधिक पसीना किसी दूसरी स्वास्थ्य समस्या या दवा के कारण हो सकता है। कुछ थायरॉइड संबंधी समस्याएं, ब्लड शुगर में बदलाव और कुछ दवाएं इसके संभावित कारण हैं।
जांघों के बीच पसीना आने को सीधे हाइपरहाइड्रोसिस नहीं कहा जा सकता। यदि यह समस्या लगातार छह महीने या उससे ज्यादा समय से है, बार-बार होती है या दैनिक जीवन को प्रभावित करती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।
क्या जांघों के बीच नमी से चैफिंग, खुजली और स्किन में जलन हो सकती है?
हेल्थ डायरेक्ट के अनुसार लगातार नमी और घर्षण से जांघों के बीच की संवेदनशील त्वचा में जलन हो सकती है। शुरुआत में हल्की लालिमा, चुभन या त्वचा में खिंचाव महसूस हो सकता है। परेशानी बढ़ने पर खुजली, छिलना, दर्द या त्वचा पर दरारें भी दिखाई दे सकती हैं।
त्वचा के फोल्ड (जहां त्वचा मुड़ती है) में नमी और घर्षण से होने वाली सूजन को इंटरट्राइगो (Intertrigo) कहा जाता है। यह ग्रोइन, बगल, पेट की त्वचा के फोल्ड और शरीर के दूसरे ऐसे हिस्सों में हो सकता है जहां त्वचा आपस में रगड़ती है। कभी-कभी प्रभावित त्वचा पर फंगल या बैक्टीरियल संक्रमण भी हो सकता है।
जांघों के बीच पसीना कम करने के लिए क्या करें?
एनएचएस के अनुसार यदि पसीना मुख्य रूप से गर्मी, उमस या घर्षण के कारण आता है, तो रोजमर्रा की कुछ आदतें राहत देने में मदद कर सकती हैं।
सांस लेने योग्य कपड़े पहनें: ढीले और आरामदायक कपड़े चुनें। ऐसे अंडरवियर से बचें जो बहुत टाइट हों या नमी को लंबे समय तक फंसाए रखें।
पसीने के बाद कपड़े बदलें: व्यायाम या लंबे समय तक बाहर रहने के बाद गीले अंडरवियर को बदलें।
त्वचा को साफ और सूखा रखें: नहाने के बाद जांघों के बीच के हिस्से को धीरे से सुखाएं। जोर से रगड़ने से जलन बढ़ सकती है।
घर्षण कम करें: यदि चलने या व्यायाम के दौरान जांघें रगड़ती हैं, तो संवेदनशील त्वचा के लिए उपयुक्त एंटी-चाफिंग उत्पाद मदद कर सकता है। इसे केवल बाहरी त्वचा पर और उत्पाद के निर्देशों के अनुसार इस्तेमाल करें।
बिना सलाह के तेज उत्पाद न लगाएं: ग्रोइन की त्वचा संवेदनशील होती है। सुगंध वाले डियोडरेंट, तेज साबुन या पसीना रोकने वाले उत्पाद जननांगों और अंदरूनी संवेदनशील त्वचा पर लगाने से जलन हो सकती है।
जांघों के बीच पसीना आना अक्सर शरीर के तापमान को नियंत्रित करने की सामान्य प्रक्रिया, गर्म और उमस भरे मौसम, त्वचा के आपसी घर्षण या कपड़ों के कारण होता है। लेकिन लगातार अत्यधिक पसीना, बार-बार होने वाली खुजली और त्वचा पर रैश को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सही कपड़े पहनना, त्वचा को सूखा रखना और घर्षण कम करना मददगार हो सकता है। यदि पसीना रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करे या उसके साथ दर्द, सूजन, असामान्य रैश अथवा रात में बहुत पसीना आने की समस्या हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

