कटनी की बजरंग गोशाला, गायों के संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक कमाई का उदाहरण भी बन गई है। यहां न केवल बेसहारा पशुओं को चारा-पानी और मेडिकल सुविधाएं मिल रही हैं बल्कि बायोगैस, जैविक खाद और प्राकृतिक कीटनाशक दवाएं बनाकर आय का स्रोत बढ़ाया गया है।
जिले में पठरा पंचायत की बजरंग गौशाला का संचालन मानव जीवन विकास समिति करती है। यहां करीब 400 गायें हैं। इनमें से कुछ पंचायत को सड़कों पर बेसहारा घूमती मिली थीं तो कुछ दान में प्राप्त हुई है। समिति इनके गोबर और मूत्र से वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत, बायोगैस, एजोला जैसे जैविक उत्पाद बनाती हैं। जिन्हें बाजार में बेचकर बीते एक साल में करीब डेढ़ लाख की आय हुई है।
जनवरी 2022 में खुली थी
मानव जीवन विकास समिति के सचिव निर्भय सिंह ने कहा- ये गौशाला जनवरी 2022 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय शुरू की गई थी। तब इसका संचालन एक स्थानीय स्वयं सहायता समूह को दिया गया था। जुलाई 2025 में इस गौशाला की जिम्मेदारी हमारी समिति को सौंपी गई।
निर्भय सिंह ने कहा- आसपास के गांवों और सड़कों पर आवारा घूम रही गायों को संबंधित ग्राम पंचायत के सरपंच के लेटर पैड के माध्यम से यहां लाया जाता है। इसके अतिरिक्त कई गायों को दान स्वरूप भी इस गौशाला में समर्पित किया गया है। गौशाला में फिलहाल तीन नियमित कर्मचारी हैं।
जैविक उत्पादन को बढ़ाने पर काम कर रहे
समिति सदस्य ओम प्रकाश यादव ने बताया कि शासन से प्रति गाय प्रति दिन ₹40 का अनुदान प्राप्त हो रहा है। वहीं, गो-उत्पादों की बिक्री से हो रही कमाई से गोशाला में अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। पिछले एक साल में जैविक उत्पादों की बिक्री से 1.5 लाख रुपए से ज्यादा की कमाई हुई है। इस आय का उपयोग गौशाला के रखरखाव और गायों के चारे-पानी पर खर्च किया जा रहा है।
यादव ने कहा- हम गोशाला में जैविक उत्पादन को बढ़ाने पर काम कर रहे हैं, ताकि किसानों को सस्ती और अच्छी जैविक खाद मिल सके। हमारी आय भी बढ़े, जिससे गायों के लिए सुविधाएं जुटाई जा सकें।

