क्या चाय की प्याली पर बनेगी बात! जानिए कितने का कारोबार होता है भारत का ईरान से

क्या चाय की प्याली पर बनेगी बात! जानिए कितने का कारोबार होता है भारत का ईरान से
नई दिल्ली: ईरान ने इजरायल पर अटैक किया है। इसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। इस युद्ध का असर कई देशों पर पड़ सकता है। ईरान ने इजरायल पर शनिवार देर रात सैकड़ों ड्रोन, क्रूज मिलाइल और बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला (Iran-Israel War) किया है। इस हमले के बाद से मध्‍य-पूर्व में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। ईरान और इजराइल के बीच युद्ध तेज होने की आशंका से पूरी दुनिया सहमी हुई है। ईरान और इजरायल युद्ध का असर भारत पर देखने को मिल सकता है। अगर दोनों देशों के बीच जंग छिड़ती है तो इससे न केवल भारत में महंगाई बढ़ने का खतरा है, बल्कि शेयर बाजार पर नकारात्‍मक असर होने की आशंका जताई जा रही है। भारत के दोनों ही देशों से कारोबारी संबंध है। ऐसे में इस युद्ध से भारत के कारोबार पर असर पड़ सकता है। आईए जानते हैं भारत के ईरान और इजरायल के साथ कैसे कारोबारी संबंध हैं। दोनों के बीच कितना कारोबार होता है। इस युद्ध का इसपर क्या असर पड़ सकता है।

इन सामानों का होता है निर्यात

भारत मुख्‍यत: ईरान को चाय, कॉफी, बासमती चावल और चीनी का निर्यात करता है। भारत से ईरान को पिछले साल करीब 15,300 करोड़ रुपये का निर्यात किया गया था। वहीं, ईरान से भारत ने पेट्रोलियम कोक, मेवे और कुछ अन्‍य चीजें आयात की थीं। इनका मूल्‍य करीब 5500 करोड़ रुपये था। भारत चाबहार पोर्ट और इससे लगे चाबहार स्‍पेशल इंडस्ट्रियल जाने में भी साझेदार है। साल 2023 में भारत का इजरायल के साथ 89 हजार करोड़ रुपये का कारोबार रहा है। भारत ने ईरान को 70 हजार करोड़ रुपये का माल और सेवाओं का निर्यात किया।

लगातार बढ़ा कारोबार

रिपोर्ट के मुताबिक, FY22 के मुकाबले FY23 में दोनों देशों के बीच कारोबार करीब 21 फीसदी से ज्यादा बढ़ा है। ईरान और इजरायल के साथ पिछले साल भारत ने करीब 1.1 लाख करोड़ रुपये का कारोबार किया था। ईरान के साथ भारत ने 20800 करोड़ का कारोबार किया। अगर ईरान-इजरायल युद्ध से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता प्रभावित होता है तो भारत को काफी नुकसान हो सकता है। दरअसल कच्चे तेल के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक अहम रास्ता है। चूंकि, भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर क्रूड ऑयल आयात करता है तो ऐसे में कच्चे तेल के दाम में तेजी से यहां वित्तीय घाटे पर बोझ बढ़ सकता है। वहीं देश में महंगाई का संकट खड़ा हो सकता है।
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