इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ोतरी ने बदले समीकरण
जीटीआरआई ने कहा कि ड्यूटी में इस बढ़ोतरी से भारत-यूएई कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) के तहत संयुक्त अरब अमीरात के रास्ते आने वाली कीमती धातुओं के इंपोर्ट के आर्थिक समीकरण भी तेजी से बदल गए हैं।भारत ने टैरिफ रेट कोटा (टीआरक्यू) सिस्टम के जरिए दुबई से सोने के इंपोर्ट की अनुमति दी थी। इस पर सामान्य 'मोस्ट-फेवर्ड-नेशन' (एमएफएन) दर से एक फीसदी कम टैरिफ लगता था।
'ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव' (GTRI) ने कहा, 'नए MFN टैरिफ फ्रेमवर्क के तहत प्रभावी ड्यूटी 15 फीसदी हो जाने से यूएई कोटे के तहत इंपोर्ट होने वाला सोना 14 फीसदी ड्यूटी पर भारत में आएगा। टैरिफ में बढ़ता यह अंतर दुबई के रास्ते दुनिया भर के बुलियन (सोने-चांदी) के इंपोर्ट को बढ़ावा दे सकता है। फिर भले ही यूएई खुद सोने या चांदी की माइनिंग करने वाला देश न हो।'
200 टन तक पहुंचने वाला है कोटा
- यह कोटा 2022 में सालाना 120 टन से शुरू हुआ था।
- 2027 तक बढ़कर 200 टन होने वाला है।
- भारत के यह सालाना सोने के इंपोर्ट का लगभग एक-चौथाई है।
'ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव' (GTRI) ने कहा, 'नए MFN टैरिफ फ्रेमवर्क के तहत प्रभावी ड्यूटी 15 फीसदी हो जाने से यूएई कोटे के तहत इंपोर्ट होने वाला सोना 14 फीसदी ड्यूटी पर भारत में आएगा। टैरिफ में बढ़ता यह अंतर दुबई के रास्ते दुनिया भर के बुलियन (सोने-चांदी) के इंपोर्ट को बढ़ावा दे सकता है। फिर भले ही यूएई खुद सोने या चांदी की माइनिंग करने वाला देश न हो।'
सीईपीए के तहत, भारत ने मई 2022 से शुरू होने वाली 10 साल की अवधि में चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी को धीरे-धीरे 10 फीसदी से घटाकर शून्य करने पर भी सहमति जताई थी। यूएई से चांदी के इंपोर्ट पर रियायती टैरिफ दर अभी 7 फीसदी है।











