लोकलुभावन घोषणा से परहेज क्‍या अपना टारगेट अचीव करेगी सरकार वित्त सचिव की जुबानी सुनिए

लोकलुभावन घोषणा से परहेज क्‍या अपना टारगेट अचीव करेगी सरकार वित्त सचिव की जुबानी सुनिए
लोकसभा चुनाव से पहले आने के कारण लोगों को उम्‍मीद थी कि वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण कुछ लुभावनी स्‍कीमों का ऐलान करेंगी। लेकिन, उन्‍होंने ऐसा नहीं किया। उन्‍होंने अंतरिम बजट को अंतरिम बजट की तरह ही पेश किया। साथ ही 2024-25 में राजकोषीय घाटे को घटाकर 5.1 फीसदी पर लाने का टारगेट सेट कर दिया।

इस पर वित्त सचिव टीवी सोमनाथन ने कहा कि सरकार का लक्ष्य महत्वाकांक्षी तो है लेकिन टैक्‍स कलेक्‍शन में बढ़ोतरी और व्यय प्रबंधन के जरिये इसे हासिल करना मुमकिन है। उन्होंने यह भी कहा कि अगले वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 5.1 फीसदी और वित्त वर्ष 2025-26 में 4.5 फीसदी करने का लक्ष्य है।


सोमनाथन ने कहा, 'लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, लेकिन यथार्थवादी भी। यह तीन स्तंभों पर आधारित है। पहला, हमने कर राजस्व में लगभग 11.5 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है। मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही यथार्थवादी धारणा है।' उन्होंने कहा कि इसके अलावा सरकार ने चालू वित्त वर्ष के ऊंचे आधार के मुकाबले गैर-कर राजस्व में थोड़ी बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है।

सोमनाथन ने खर्च के मोर्चे पर कहा, 'पूंजीगत व्यय में 11.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है... हमारा मानना है कि राजस्व व्यय का अनुमान वास्तविक धारणा पर आधारित है। हमें इस तथ्य से मदद मिली है कि खाद्यान्न या उर्वरक जैसी हमारी कुछ सब्सिडी नहीं बढ़ी है। ये दोनों या तो स्थिर हैं या इनमें थोड़ी गिरावट हुई है।'

सरकार ने सब्‍सि‍डी पर क‍िया वार
सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए आवंटित 1.88 लाख करोड़ रुपये की तुलना में अगले वित्त वर्ष के लिए उर्वरक सब्सिडी 1.64 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया है। इसी तरह बजट अनुमानों के मुताबिक, फूड सब्सिडी चालू वित्त वर्ष के 2.12 लाख करोड़ रुपये की तुलना में घटकर 2.05 लाख करोड़ रुपये रह जाएगी।


सोमनाथन ने कहा, 'इन तीन स्तंभों - तार्किक राजस्व बढ़ोतरी, गैर-कर राजस्व में उचित वृद्धि और पूंजीगत व्यय में एक संतुलित बढ़त के आधार पर हमें पूरा भरोसा है कि हम राजकोषीय घाटे का लक्ष्य हासिल कर लेंगे।’ इस तरह राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष के 17,34,773 करोड़ रुपये के मुकाबले अगले वित्त वर्ष में 16,85,494 करोड़ रुपये होगा।

पूंजीगत व्यय पर आलोचना को खारिज करते हुए सोमनाथन ने कहा, 'बहुत ऊंचे आधार पर 11.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यह एक लाख करोड़ रुपये से ज्‍यादा की है... पहले, एक छोटा आधार था, लेकिन अब हमारे पास एक बड़ा आधार है, इसलिए छोटी बढ़ोतरी ही हो सकती है।'

उन्होंने कहा कि 11.11 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय सिर्फ एक चेक पर हस्ताक्षर करके नहीं किया जा सकता है। अलबत्‍ता, इसके लिए जमीन पर काम करने की जरूरत है। इसमें मंजूरी, भूमि अधिग्रहण और निर्माण जैसे मसले शामिल हैं।

क्‍या होता है राजकोषीय घाटा, कैसे पड़ता है असर?
जब सरकार का कुल खर्च (कैपिटल और रेवेन्‍यू एक्‍सपेंडिचर) उसकी कुल आमदनी (टैक्‍स और नॉन टैक्‍स रिसीप्‍ट्स) से ज्‍यादा होता है तो उस स्थिति में राजकोषीय घाटा होता है। इसे GDP के फीसदी के रूप में भी दिखाया जाता है। बजट में अर्थशास्‍त्रियों की सबसे ज्‍यादा नजर इसी पर होती है। राजकोषीय घाटे के कुछ नकारात्मक प्रभाव होते हैं। इससे सरकार का कर्ज बढ़ता है। सरकार राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए उधार लेती है। इससे उधारी का बोझ बढ़ जाता है। लिए गए कर्ज पर ब्याज का भुगतान करना पड़ता है। यह सरकार के खर्च का बड़ा हिस्सा बन जाता है। सरकार के उधार लेने पर महंगाई में इजाफा हो सकता है।

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