कोटक AMC से पहले SBI MF ने भी स्मॉल कैप फंड में एकमुश्त निवेश को निलंबित कर दिया था। इसके बाद निप्पॉन इंडिया लाइफ असेट मैनेजमेंट और टाटा म्यूचुअल फंड ने भी घोषणा की थी कि वह स्मॉल कैप में एकमुश्त राशि स्वीकार करना और स्विच-इन इन्वेस्टमेंट बंद करने का फैसला कर रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि एक के बाद एक फंड हाउसेज द्वारा स्मॉलकैप फोकस्ड् स्कीम्स में एकमुश्त निवेश के लिए दरवाजे बंद करना इस बात का संकेत है कि अब ये निवेशकों के लिए सुरक्षित ठौर नहीं रहे।
क्या है वजह?
White Oak Capital Management के CEO आशीष सौमय्या कहते हैं, ‘यह निर्णय फंड हाउस निवेशकों के हित में लेते हैं। पिछले दो साल में स्मॉल कैप में काफी रिटर्न आ चुका है और अब यह डिस्कशन में है कि यह स्टॉक्स महंगे भी काफी हो चुके हैं। एक साइज के बाद इनमें वैसा ही रिटर्न आए, यह अब डाउटफुल है। स्मॉल कैप में 250 स्टॉक्स हैं और मिड कैप में 150 और इनका साइज भी लिमिटेड है। अगर बहुत सारा पैसा आता है तो फंड हाउस उसे सिलेक्टेड स्टॉक्स में ही डालेंगे। ऐसे में मार्केट के लेवल को देखते हुए फंड हाउस को रिस्ट्रिक्शन करना होता है।’
रिटर्न है समस्या?
वैल्यू रिसर्च के CEO धीरेंद्र कुमार का कहना है कि स्मॉलकैप स्टॉक अपने लार्जकैप काउंटरपार्ट्स की तुलना में अधिक वोलेटाइल होते हैं। इसलिए इसमें लॉन्गटर्म व्यू होना जरूरी है। मिड कैप-स्मॉल कैप फंड्स ने 2023 में 40-45 पर्सेंट रिटर्न दिया है। इस जोरदार परफॉरमेंस के बाद जिस गति से पैसा आ रहा है, वह चिंता पैदा करता है।
क्या है डर?
रेगुलेटर SEBI ने भी रिटेल निवेशकों द्वारा स्मॉलकैप शेयरों व फंड्स में में जरूरत से ज्यादा निवेश करने को लेकर चिंता जताई है। जानकारों का कहना है कि अगर अगर वोलेटिलिटी आती है तो भारी मात्रा में विड्रॉवल हो सकता है। मिड-स्मॉल कैप स्टॉक्स एक्सचेंज पर हेल्दी ट्रेडिंग वॉल्यूम एन्जॉय नहीं करते हैं। कोविड के समय इनका ट्रेडिंग वॉल्यूम बहुत गिर गया था।











