जेफरीज के भास्कर चक्रवर्ती ने कहा कि पहले जियो टैरिफ बढ़ाने में पहल नहीं करती थी लेकिन हाल में वह टैरिफ बढ़ोतरी में सबसे आगे रही। मॉनिटाइजेशन और सब्सक्राइबर मार्केट शेयर बढ़ाने पर फोकस करना इस बात का संकेत है कि कंपनी कैलेंयर ईयर 2025 में लिस्टिंग की तरफ बढ़ रही है।
जियो को बाजार में लिस्टिंग करने के लिए अंबानी के पास दो विकल्प हैं। पहला विकल्प है आईपीओ और दूसरा जियो फाइनेंशियल सर्विसेज (जेएफएस) जैसा स्पिन-ऑफ। संस्थागत निवेशक स्पिन-ऑफ रूट का पक्ष लेते हैं क्योंकि होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट लिस्टेड एंटिटी पर लागू नहीं होगी। लेकिन आईपीओ से लिस्टिंग के बाद रिलायंस को जियो पर मैज्योरिटी कंट्रोल बनाए रखने में मदद मिलेगी।
जियो को बाजार में लिस्टिंग करने के लिए अंबानी के पास दो विकल्प हैं। पहला विकल्प है आईपीओ और दूसरा जियो फाइनेंशियल सर्विसेज (जेएफएस) जैसा स्पिन-ऑफ। संस्थागत निवेशक स्पिन-ऑफ रूट का पक्ष लेते हैं क्योंकि होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट लिस्टेड एंटिटी पर लागू नहीं होगी। लेकिन आईपीओ से लिस्टिंग के बाद रिलायंस को जियो पर मैज्योरिटी कंट्रोल बनाए रखने में मदद मिलेगी।











