आज शेखर अपने इस बिजनेस से अच्छी कमाई कर रहे हैं। इनके फूड बिजनेस का नाम 'मां का दुलार' है। शेखर बताते हैं कि उन्हें साउथ इंडियन खाना भी पसंद है। बेंगलुरु आने के बाद वह साउथ इंडियन खाने का लुत्फ उठाते थे। लेकिन मां के हाथ से बने घर के खाने की भी काफी कमी महसूस करते थे। वह बताते हैं कि उन्हें खाने के साथ तालमेल बिठाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने बाद में महसूस किया मां के हाथ के खाने की कमी महसूस करने वाले वह अकेले नहीं थे।
बेंगलुरु की महिलाओं को कारोबार से जोड़ा
ऐसे आया आइडिया
वह बताते हैं कि साल 2015 में उन्होंने एक जानकार महिला से घर का खाना बनाने को कहा। वह तैयार हो गईं। इसके बाद उन्होंने अपने कुछ दोस्तों से घर का खाना खाने के बारे में पूछा। वे तैयार हो गए। इसके बाद उन्होंने उस महिला के हाथ का बना हुआ घर का खाना दोस्तों को डिलीवर किया।
...और बढ़ता गया कारोबार
साल 2020 में जब कोरोना आया तो उने बिजनेस में बड़ा बदलाव आया। उन्हें पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा ऑर्डर मिलने लगे। उसी समय उन्होंने जॉब छोड़ अपने इस कारोबार में पूरी तरह कदम रख दिया। हालांकि इसके बाद उन्हें घर और दूसरे लोगों से कई तरह की प्रतिक्रियाएं मिलीं। लेकिन उन्होंने इनकी परवाह नहीं की और अपने कारोबार पर फोकस रखा।











