वीआईपी कल्चर:भोपाल से अधिक इंदौर में हूटर बजाकर नेतागिरी का शौक! चंबल भी पीछे नहीं

वीआईपी कल्चर:भोपाल से अधिक इंदौर में हूटर बजाकर नेतागिरी का शौक! चंबल भी पीछे नहीं
भोपाल/ इंदौर/ग्वालियर, गाड़ी पर हूटर लगाकर वीआईपी रुतबा दिखाने का शौक मध्य प्रदेश में खूब सिर चढ़कर बोल रहा है। कोई नेता जैसा दिखना चाहता है तो कोई सड़क पर अलग पहचान बनाना।

यही वजह है कि बीते ढाई साल में प्रदेश में अवैध हूटर लगाने पर 1 हजार से अधिक चालान काटे गए हैं। प्रदेश में सबसे ज्यादा क्रेज इंदौर में देखने को मिला, जहां 255 से अधिक लोगों पर कार्रवाई हुई।

भोपाल भी इससे अछूती नहीं रही और यहां 141 चालान कटे। बड़े शहरों के अलावा चंबल अंचल भी वीआईपी रुतबा दिखाने में पीछे नहीं हैं। यहां मुरैना में 100 से अधिक और भिंड में 92 चालान काटे गए हैं। हालांकि श्योपुर में जरुर 10 लोगों पर ही कार्रवाई हुई है। वहीं गाड़ी में अवैध हूटर लगाने पर दतिया में 52 के खिलाफ चालानी कार्रवाई हुई है।

1 जनवरी 2024 से 30 जून 2026 तक के आंकड़े बताते हैं कि अवैध हूटर लगाने पर उज्जैन में 68 चालान काटे गए। दिलचस्प बात यह है कि टीकमगढ़ में ढाई साल में हूटर लगाने के एक भी मामले में चालान नहीं काटा गया।

चालान तो काटा, पर सरकारी खजाने में जमा करना ही भूल गए

अवैध हूटर लगाने वालों से वसूले गए चालान का हिसाब भी पूरी तरह दुरुस्त नहीं है। प्रदेश के कई जिलों में चालान की राशि सरकारी खजाने तक पहुंचने से पहले ही 'पेंडिंग' हो गई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 1 लाख रुपए से अधिक की राशि अब तक शासन के मद में जमा नहीं हो सकी है।

देवास में 2024 में दो चालानों से 60 हजार रुपए वसूले जाने की जानकारी दी गई, लेकिन सरकारी खजाने में सिर्फ 30 हजार रुपए ही जमा हुए। इंदौर में वर्ष 2025 के 56 हजार और 2026 के 12 हजार रुपए अब तक जमा नहीं हो पाए हैं।

हूटर का उपयोग केवल उन वाहनों में किया जा सकता है, जिन्हें कानून अथवा शासन के आदेश से इसकी अनुमति प्राप्त हो। पुलिस वाहन, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और अन्य अधिकृत एमरजेंसी सेवाओं के वाहनों में हूटर लगाया जाता है, ताकि सड़क पर उन्हें प्राथमिकता मिल सके। आम नागरिक, राजनीतिक दलों के पदाधिकारी अपनी गाड़ियों में हूटर नहीं लगा सकते।

अवैध रूप से हूटर लगाने पर मोटरयान नियमों के तहत मौके पर शमन शुल्क वसूल सकते हैं। नियम तोड़ने पर कोर्ट 500 से 1500 तक का जुर्माना लगा सकता है।

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