नई दिल्ली में चीन के दूतावास ने एक बयान जारी करके कहा कि गार्सेटी का दलाई लामा से मिलना चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप है। चीन ने कहा कि किसी भी विदेशी ताकत को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है। चीन विदेशी अधिकारियों और तिब्बती स्वतंत्रता चाहने वाली ताकतों के बीच किसी भी प्रकार संपर्क का कड़ा विरोध करता है। चीन ने कहा कि तिब्बती मामलों पर विशेष अमेरिकी दूत पूरी तरह से अपराध है। यह कदम चीन के आंतरिक मामलों में राजनीतिक हस्तक्षेप है।
दलाई लामा से संपर्क कर रहा है चीन
चीन ने कहा कि यह तिब्बत में विकास और स्थिरता को कमतर करता है। चीन इसका हमेशा से ही विरोध करता रहा है और कभी भी इसको मान्यता नहीं दी है। उसने दावा किया, '14वें दलाई लामा किसी भी तरह से धार्मिक चेहरा नहीं हैं, इसकी बजाय वह एक राजनीतिक निर्वासित व्यक्ति हैं जो चीन विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं। साथ ही तिब्बत को चीन से अलग करना चाहते हैं।' यही नहीं चीन ने तिब्बत की निर्वासित सरकार को लेकर भी हमला बोला और इसे गैरकानूनी तथा चीन के संविधान के खिलाफ करार दिया था।चीन ने अमेरिका से कहा कि वह तिब्बत को चीन का हिस्सा मानने के अपने वादे को पूरा करे। साथ ही चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना बंद करे। इसके अलावा दलाई लामा की अलगाववादी नीतियों को समर्थन देना बंद करे। इससे पहले दलाई लामा ने खुलासा किया था कि चीन उनके साथ बातचीत करना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि तिब्बत स्वतंत्रता नहीं चाहता है। उन्होंने कहा कि वह हमेशा से ही चीन के साथ बातचीत करना चाहते हैं। वे मुझसे आधिकारिक या पर्दे के पीछे से संपर्क करना चाहते हैं और मैं भी बातचीत के लिए तैयार हूं।











