अवैध रूप से म्यामांर पहुंचे दो पाकिस्तानी, रोहिंग्याओं के साथ मिलकर फैलाना चाहते थे 'आतंक', सेना ने पाकिस्तान को रखा रडार पर

अवैध रूप से म्यामांर पहुंचे दो पाकिस्तानी, रोहिंग्याओं के साथ मिलकर फैलाना चाहते थे 'आतंक', सेना ने पाकिस्तान को रखा रडार पर
यंगून: आतंकवाद का कहीं भी नाम आता है तो वह पाकिस्तान के साथ जुड़ता है। पाकिस्तान के आतंकी दुनिया भर में आतंक फैलाते हैं। लेकिन अब वह म्यांमार भी पहुंचने लगे हैं, जिसके कारण यहां का सैन्य शासन पूरी तरह से नाराज है। दो अवैध पाकिस्तानियों के देश में घुसने पर म्यांमार की जुंटा (सैन्य शासन) नाराज है। जुंटा ने इन अवैध प्रवासियों की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान की गतिविधियों को जांच के दायरे में रखा है। माना जा रहा है कि ये पाकिस्तानी म्यांमार में रोहिंग्या आतंकियों के साथ काम करने के लिए देश में दाखिल हुए।

रोहिंग्या आतंकी म्यांमार में आतंक फैलाते हैं। दो नागरिकों की गिरफ्तारी के बाद म्यांमार में पाकिस्तान का दूतावास इनकी रिहाई में जुट गया है। इस कारण म्यांमार में पाकिस्तानी गतिविधियों को लेकर संदेह और भी गहरा हो गया है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी अधिकारियों ने अदालत में दोनों अपराधियों के खिलाफ मामले को रद्द करने के लिए म्यांमार के अधिकारियों के साथ संपर्क किया। उन्होंने अवैध तरीके से पहुंचे इन लोगों के निर्वासन की मांग की है।

पाकिस्तान में आतंक की खेती

रोहिंग्याओं के प्रभुत्व वाला अका मुल मुजाहिदीन (AAM) हरकत-उल-जिहाद इस्लामी अराकान (HUJI-A) से उभरा है, जो पाकिस्तान में मौजूद एक चरमपंथी संगठन है। म्यांमार में रोहिग्या आतंकवाद का समर्थन करने में यह शामिल है। इस बात के सबूत म्यांमार के पास हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इसका नेतृत्व अब्दुस कादूस बर्मी कर रहा है, जो रोहिंग्या मूल का पाकिस्तानी नागरिक है। यह हाफिज समेत कई आतंकी संगठनों के साथ करीबी से जुड़ा है, जो कट्टरपंथी रोहिंग्या कैडरों को आतंकी और विस्फोटक देते हैं।

म्यांमार से भागे रोहिंग्या

रोहिंग्या मुस्लिम म्यांमार से भागे हुए हैं। इनकी एक बड़ी आबादी बांग्लादेश और भारत में रहती है। मई में बांग्लादेश में रहने वाले शरणार्थियों ने कहा था कि वो वापस नहीं जाने वाले। बांग्लादेश की सीमा के पास लगभग 10 लाख रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थी रहते हैं। शरणार्थियों को वापस म्यांमार पहुंचाने के लिए बांग्लादेश कोशिश कर रहा है। उसके अधिकारियों ने कई यात्राएं की हैं। रोहिंग्याओं का कहना है कि वह तभी वापस जाएंगे जब उनकी सुरक्षा की गारंटी होगी।

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